भास्कर ब्रेकिग:एमबीबीएस के मार्क्स देख होगी झारखंड में डाॅक्टराें की नियुक्ति

रांची8 महीने पहलेलेखक: पवन कुमार
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  • नहीं मिल रहे डॉक्टर, लिखित परीक्षा न लेने की तैयारी

राज्य में डॉक्टरों की घोर कमी को देखते हुए राज्य सरकार अब स्वास्थ्य सेवा भर्ती नियमावली में संशोधन करने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसके तहत अब राज्य में डॉक्टरों की सीधी नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा नहीं होगी। अभ्यर्थियों के एमबीबीएस मार्क्स और कार्य अनुभव से जुड़े सर्टिफिकेट देखकर उनकी नियुक्ति की जाएगी।

प्रस्ताव के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा डॉक्टरों की नियुक्ति की जा सके, इसके लिए अनारक्षित वर्ग के आवेदनकर्ता डॉक्टरों को उम्रसीमा में 10 साल की छूट दी जाएगी। यानी निर्धारित की गई 35 साल की उम्रसीमा बढ़ाकर 45 साल कर दी गई है। आरक्षित वर्गों और विकलांगों के लिए भी उम्रसीमा में छूट देने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में भेजा जाएगा। मंत्रिपरिषद की बैठक में इस पर मुहर लगते हुए संशोधित नियमावली के आधार पर नियुक्ति शुरू हाे जाएगी।

आवेदकों के मार्क्स की गणना ऐसे होगी

  • 100 अंकाें में 60 एमबीबीएस मार्क्स के लिए मिलेंगे।
  • डॉक्टरों के लिए तैयार हो रही नई भरती नियमावली के तहत एमबीबीएस के लिए 60 अंक मिलेंगे।
  • प्रतिवर्ष के दर से पांच के लिए अधिकतम 25 अंक रखे गए हैं।, विदेश से प्राप्त सभी डिग्रीधारकों के एमीबीबएस मार्क्स की गणना 50% पर की जानी है, बशर्ते उनका निबंधन एमसीआई से हो।
  • सरकारी अथवा निजी अस्पताल में नियमित या अनुबंध के आधार पर कार्यरत एमबीबीएस डिग्री धारकों को नियुक्ति के बाद कार्यानुभव एवं संतोषप्रद सेवा के लिए अधिकतम पांच अंक मिलेंगे।
  • पीजी- डीएम-एमसीएच और समकक्ष डिग्री (भारतीय चिकित्सा परिषद से मान्यता प्राप्त) के लिए 15 अंक दिए जाएंगे।
  • यदि विदेशी विश्वविद्यालय में साढ़े चार वर्षों का एमबीबीएस कोर्स एवं एक साल की रोटेटिंग इंटर्नशिप की गई है और यदि यह विश्वविद्यालय एमसीआई से मान्यता प्राप्त है तो उनकी डिग्री को मान्यता दी जाएगी।

इसलिए सरकार ले रही यह निर्णय: वर्तमान प्रक्रिया से डॉक्टरों की नियुक्ति में हो रहा विलंब
प्रस्ताव में कहा गया है कि नियुक्ति की वर्तमान प्रक्रिया में बिलंब होता है जिसके कारण राज्य के कई डॉक्टर बाहर चले जाते हैं। कोरोना काल के दौरान डॉक्टरों की नियुक्ति में स्वास्थ्य विभाग को ऐसी परेशानी सामने आए हैं। इसके अलावा अभी राज्य में सामान्य वर्ग के डॉक्टरों की नियुक्ति की अधिकतम सीमा 35 साल है। लेकिन डॉक्टरी पास करते-करते काफी समय लगने के कारण कई छात्र अधिकतम सीमा पार कर जाते हैं। कई राज्यों में डॉक्टरों की नियुक्ति की अधिकतम सीमा 45 साल की गई है।

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