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  • Due To The Closure Of Schools And Colleges, The Risk Of Mental Stress Is Increasing Among Children And Adolescents Imprisoned In Homes.

कोरोना इफेक्ट:स्कूल-कॉलेज बंद होने के कारण, घरों में कैद बच्चों व किशोरों के बीच बढ़ रहा मानसिक तनाव का खतरा

रांची25 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • यूनेस्को ने कहा- कोरोना काल में स्कूल बंद होने से 862 मिलियन बच्चे व युवा प्रभावित

कोरोना का सामाजिक परिवर्तन के साथ बच्चों के जीवन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है। यूनेस्को के मुताबिक, कोरोना काल में स्कूल बंद होने से 862 मिलियन बच्चे और युवा प्रभावित हुए हैं, जो वैश्विक छात्र आबादी की अनुमानित आधी संख्या है। बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य कई तरह से प्रभावित हुआ है, क्योंकि इस स्थिति ने उनके बढ़ने, सीखने, खेलने, व्यवहार, बातचीत और भावनाओं को प्रबंधित करने के तरीके को बदल दिया है। दुनिया में लगभग 15 प्रतिशत बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार आए हैं।

इनमें लगभग 50 प्रतिशत मानसिक विकार 14 साल के बच्चों को प्रभावित करने लगा है। लॉकडाउन के कारण बच्चों का खेलना-कूदना बंद हो गया है। इससे उनमें नकारात्मकता आने का खतरा है। 26 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में तनाव और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। वयस्कों की तरह किशोर विशेष रूप से कोविड-19 से संबंधित भावनात्मक प्रतिक्रियाओं जैसे अकड़न, व्याकुलता, महामारी के बारे में सवाल पूछने का डर और चिड़चिड़ापन का अनुभव करते हैं।

मुख्य कारण...

  • लॉकडाउन में स्कूल व डे-केयर के बंद होने से बच्चों वाले परिवारों की रूटीन बिगड़ गई है।
  • मानसिक कठिनाई के समय में बच्चों को माता पिता व शिक्षकों का पूरा साथ नहीं मिल पाना।
  • बीमार परिजनों के बारे में लगातार सुनने व करीबी जन की मौत से उत्पन्न असुरक्षा की भावना।
  • शारीरिक सक्रियता में आई कमी, स्क्रीन पर अधिक समय बिताना, अनियमित नींद पैटर्न।
  • अधिक समय तक का अकेलापन भविष्य की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सूचक है।
  • भविष्य की महत्वाकांक्षा, शिक्षा, व्यक्तिगत संबंधों के प्रति अनिश्चितता और महामारी के कारण निष्क्रियता बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती रही है, जो उन्हें नशीली दवाओं के दुरुपयोग के जोखिम में डाल सकती है।

यह है समाधान...

  • अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों ने भी सरकार को मानसिक संकट से निपटने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। कोविड-19 से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं और युवा मानसिक स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव के बारे में जानकारियां अभी भी काफी कम हैं।
  • लगातार टीवी या मोबाइल पर देखने, गाने सुनने और पढ़ने से ब्रेक लेते रहना जरुरी है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर महामारी को लेकर दी जा रही खबरों को भी बहुत ज्यादा नहीं देखना चाहिए।
  • माता-पिता तथा परिवार के अन्य सदस्य बच्चों के लिए सकारात्मक पालन-पोषण को नियोजित करते हुए सकारात्मक के माध्यम से तनाव भरे माहौल से बचने के लिए दिनचर्या बना सकते हैं।
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