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सेवाओं का शुभारंभ:कोरोना काल में फेफड़े पर असर, अब रिम्स में 2 सेकेंड में होगी स्कैनिंग, सेंट्रल लैब में रोज 10 हजार जांच संभव

रांची15 दिन पहले
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किसी भी महामारी के लिए नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी, नई मशीन से जल्द हो सकेगी फेफड़े की स्कैनिंग। - Dainik Bhaskar
किसी भी महामारी के लिए नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी, नई मशीन से जल्द हो सकेगी फेफड़े की स्कैनिंग।
  • रिम्स निदेशक बोले- हार्ट और ब्रेन की खून की नलियों की जांच भी जल्द होगी

रिम्स मेें मरीजों की सुविधा लगातार बढ़ाई जा रही है। इसी कड़ी में बुधवार को मरीजाें के लिए चार सेवाओं का शुभारंभ किया गया। निदेशक डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने सभी उपकरणों की विशेषता बताई। बताया कि रिम्स में लगी सीटी स्कैन मशीन की लागत करीब 11 करोड़ है।

256 स्लाइस की इस मशीन से मात्र दो सेकेंड में फेफड़े की स्कैनिंग हो सकेगी। कोविड के दौरान सबसे ज्यादा प्रभाव फेफड़े पर पड़ा है, ऐसे में यह काफी लाभकारी साबित होगा। इसके अलावा हार्ट और ब्रेन की खून की नलियों की जांच त्वरित गति में बगैर सांस रोके हो सकेगी।

पुराने वार्डों को ऑक्सीजन सप्लाई रोका : सीटी स्कैन के अलावा सेंट्रल लैब में खून जांच के लिए आधा दर्जन से ज्यादा उपकरण स्थापित किए गए हैं। इसमें किडनी, लीवर, हार्ट व शुगर समेत 10 हजार से ज्यादा जांच प्रतिदिन करने की क्षमता है। हिमोग्लोबिन की जांच मशीन में 4000 और किडनी-पेशाब आदि की भी 120 तरह की जांच रिम्स में हो सकेगी। पीएसए प्लांट से प्रति मिनट 1900 लीटर ऑक्सीजन की सप्लाई हो सकेगी। रिम्स के पुराने वार्डों को इससे जोड़ा गया है। रिम्स ही नहीं कोरोना या कोई दूसरी महामारी भी आएगी तो राज्य में अब ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।

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