लॉकडाउन की मार / 31 के बाद भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर संशय सरकार को केंद्र के आदेश का है इंतजार

Even after 31, the government is skeptical on public transport, waiting for the order of the Center
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Even after 31, the government is skeptical on public transport, waiting for the order of the Center

  • यात्री परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की स्थिति खराब

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 06:14 AM IST

रांची. राजधानी रांची सहित राज्यभर में 31 मई के बाद भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू होने पर संशय है। केंद्र सरकार ने रेड जोन से बाहर के जिलों में 50 फीसदी बसों के परिचालन की छूट दी है, लेकिन राज्य सरकार ने फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। 31 मई को लॉकडाउन समाप्त हो रहा है, उसके बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू करने का फैसला भी सरकार हालात की समीक्षा के बाद लेगी।

हालांकि, परिवहन विभाग अंतरराज्यीय बसों, शहर में ऑटो और ई-रिक्शा के परिचालन के लिए गाइडलाइन बना रहा है। परिवहन सचिव के. रवि कुमार ने बताया कि सरकार से जैसे ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू करने का निर्देश मिलेगा, राज्य में यह व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। इधर, झारखंड यात्री संघ सहित बस ऑनर एसोसिएशन, ऑटो एसो. और ई-रिक्शा चालक संघ लगातार वाहन परिचालन में छूट देने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा चालकों का परिवार अब भुखमरी के कगार पर आ गया है।

रांची में 10 हजार ऑटो चलते हैं, मात्र 2300 का है परमिट 

  • 8000 ई-रिक्शा हैं, 45 सिटी बसों का होता है परिचालन
  • 1000 बसों का विभिन्न जिलों व दूसरे राज्यों में होता है परिचालन 

स्थिति स्पष्ट करे विभाग
अब बसों का परिचालन होगा तो काफी कम यात्री बस में सफर कर सकेंगे। इससे किराया भी बढ़ेगा। परिवहन विभाग को तत्काल बस मालिकों के साथ बैठक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। क्योंकि बस नहीं चलने से कर्मचारियों और मालिकों की भी स्थिति खराब हो रही है। - किशोर मंत्री सचिव, रांची बस ऑनर एसो. 

ऑटो चालकों की स्थिति खराब
कैब चलाने की छूट दे दी, जितनी जल्दी हो सके सरकार ऑटो परिचालन की छूट दे, ताकि आम लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो और ऑटो चालकों का परिवार भी भुखमरी से बच जाए। - शमीम अख्तर अध्यक्ष, छोटानागपुर टैक्सी-टेंपो चालक संघ 

शहर में हजारों लोग लोन पर ई-रिक्शा लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। लेकिन, लॉकडाउन से ऐसे परिवारों की स्थिति खराब हो गई है। ई-रिक्शा को भी सभी रूटों में सीमित संख्या में ही सही, लेकिन चलाने की छूट मिलनी चाहिए। - शकील राईन, अध्यक्ष, ई-रिक्शा-ठेला मजदूर संघ

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