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रेडिएशन से ज्यादा खतरा:हाेम आइसोलेशन वाले भी करा रहे एचआरसीटी, ऑक्सीजन लेवल 95 से ज्यादा है तो न कराएं टेस्ट

रांचीएक महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • शहर के चार बड़े जांच घर में दो दिनों में 44 होम आइसोलेशन वाले रोगियों की हुई है जांच
  • फेफड़े का संक्रमण जानने को एचआसीटी जरूरी, पर स्वस्थ लोगों को इसके रेडिएशन से ज्यादा खतरा

कोरोना संक्रमण से होम आइसोलेशन में लड़ रहे रोगियों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। अधिकांश रोगियों को एक सप्ताह के बाद निगेटिव की श्रेणी में डाला जा रहा है। यह राहतवाली बात है। मगर होम आइसोलेशन वाले मरीज जिनका ऑक्सीजन लेवल 95 फीसदी से ज्यादा है, वे बगैर डॉक्टरी सलाह के ही एचआरसीटी करा रहे हैं। यह काफी खतरनाक है।

शहर के कुछ रेडियोलॉजी जांच घर के कर्मचारियों ने बताया कि हर दिन होम आइसोलेशन वाले 10-12 लोग एचआरसीटी कराने पहुंच रहे हैं। अधिकांश के पास डॉक्टर का पुर्जा भी नहीं होता है। ऐसे में कुछ सेंटरों से मरीजों को लौटा दिया जाता है। लेकिन इन सबके बावजूद 80 फीसदी मरीजों की जांच की जा रही है। इधर, सामान्य रोगियों के एचआरसीटी को लेकर चिकित्सकों का कहना है कि यदि आक्सीजन लेवल 95 से ज्यादा है, तो जांच करानी ही नहीं चाहिए। फेफड़े में संक्रमण काे पहचानने का तरीका फिलहाल ऑक्सीजन लेवल ही है। अगर यह सामान्य है, तो संक्रमण की गुंजाइश ही नहीं है।

विशेषज्ञों से जानिए... एक बार सीटी स्कैन कराने का मतलब है कि आपने 300 बार एक्सरे करा लिया

एम्स, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के अनुसार, लोग सोचते हैं कि पॉजिटिव होने के बाद सीटी स्कैन करा लें। पॉजिटिव होने के बाद शुरू में सीटी स्कैन कराने का कोई फायदा नहीं। कम लक्षण हैं, तो कोई फायदा नहीं है। एक स्टडी में सामने आया है कि अगर आप कराते हैं, तो इसमें लंग्स में कुछ पैचेज दिखेंगे, लेकिन ये बिना इलाज के खत्म हो जाते हैं। दूसरा इसका नुकसान यह है कि आपने एक सीटी स्कैन कराया, तो इसका मतलब है कि आपने चेस्ट के 300 एक्सरे करा लिए। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी कमिशन,जो रेडिएशन प्रोटेक्शन मेडिसिन की बात करते हैं उनका कहना है कि बार-बार युवाओं को सीटी स्कैन कराने से भविष्य में कैंसर का खतरा है।

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