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भू-राजस्व विभाग:100 एकड़ सरकारी भूमि के अवैध हस्तांतरण से जुड़ी फाइल मिली, दोषियों पर कार्रवाई की चुनौती

रांचीएक महीने पहलेलेखक: जीतेंद्र कुमार
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  • फाइल गायब होने के आरोप में छह माह पूर्व सीओ अभिषेक श्रीवास्तव का हुआ था तबादला

भू-राजस्व विभाग को विभाग में ही हेहल अंचल के बजरा मौजा की लगभग 100 एकड़ सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण से जुड़ी फाइल मिल गई। फाइल मिलने के बाद विभाग के ऊपर इस संचिका में दोषी ठहराए गए अंचलाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चुनौती बढ़ गई है। कार्रवाई का नैतिक दबाव भी बढ़ गया है। इधर फाइल मिलने के बाद विभाग द्वारा धुर्वा थाने में फाइल के गायब होने को लेकर दर्ज एफआईआर (124 दिनांक 27 जुलाई 2021) को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू क दी गई है।

इधर, भू-राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव एलबी ख्यांगते से फाइल मिलने के बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बारे में पूछने पर उन्होंने कुछ भी बोलने से साफ इंकार किया। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन संयुक्त सचिव अभिषेक श्रीवास्तव आरोपियों को बचाने का अनौपचारिक आरोप भी लगा। उसके बाद उनका भू-राजस्व से स्थानांतरण भी कर दिया गया। उनके स्थानांतरण के लगभग 6 माह बाद अब फाइल मिली है।

दोषियों पर कार्रवाई और सीआईडी जांच की अनुशंसा
रांची के हेहल अंचल के बजरा मौजा के खाता संख्या 119, प्लॉट संख्या-336, सब प्लॉट संख्या 336, जी-टू, रकबा 9 कट्ठा को लेकर दो पक्षों के बीच मूल विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद यह आशंका पैदा हुई कि इस मौजे में लगभग 120 एकड़ सरकारी भूमि का भी अवैध नामांतरण कर दिया गया है। जिस कारण विवाद की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के आदेश पर एसआईटी का गठन हुआ। एसआईटी ने छह अप्रैल को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें हेहल अंचल के दोषी अंचलाधिकारियों, अंचल निरीक्षक व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ साथ पूरे मामले की जांच सीआईडी से कराए जाने की अनुशंसा की गई।

आगे क्या: कार्रवाई नहीं हुई तो मामला कोर्ट में भी जा सकता है
अब विभाग को एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर तत्काल दोषियों पर कार्रवाई करनी पड़ सकती है। इतने बड़े जमीन घोटाले की एसआईटी जांच रिपोर्ट की अनुशंसा के आलोक में सीआईडी जांच भी करानी पड़ सकती है। अन्यथा मामला कोर्ट में जा सकता है।

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