नियमों की अनदेखी...:जमकर आतिशबाजी...नहीं दिखा कोरोना और प्रदूषण के मद्देनजर जारी गाइडलाइन का असर

रामगढ़एक महीने पहलेलेखक: अंकित कुमार
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दीपावली के दौरान शहर का दृश्य। - Dainik Bhaskar
दीपावली के दौरान शहर का दृश्य।

दीपावली के अवसर पर रामगढ़ जिला में जमकर पटाखे छोड़े गए। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन का असर नहीं दिखा। कोरोना और प्रदूषण की स्थिति देखते हुए जिला प्रशासन ने गाइडलाइन जारी किया था। इसके तहत ग्रीन पटाखे केवल दो घंटे छोड़ना था। लेकिन इसका असर देखने को नहीं मिला। शहर में रात भर लोग पटाखे छोड़ते देखे गए।

इस कारण वायू प्रदूषण में बेतहाशा वृद्घी देखी गई। दीपावली से एक सप्ताह पूर्व 28 अक्टूबर को प्राप्त आंकडे के अनुसार 51.5, 51.48, 51.96, 52.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर प्रदूषण दिखा। वहीं दीपावली के अवसर पर 4 नवंबर को यह आंकड़ा 77.11, 81.95, 103.29 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर प्रदूषण का ग्राफ मापा गया।

पटाखे मात्र दो घंटे शाम 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक ही जलाने की अनुमति
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के आदेश द्वारा वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण ) अधिनियम , 1981 की धारा 31 (ए) के कई आदेश जारी किए गए थे। इसके तहत रामगढ़ जिलांतर्गत शहरी क्षेत्रों में जहाँ की वायु गुणवत्ता स्तर गत नवम्बर , 2019 के दौरान “ थोड़ा प्रदूषित श्रेणी में आते हैं, वहाँ केवल “ हरित पटाखों “ की ही बिक्री की जाने की बात कही गई।

साथ ही दीपावली के दिन पटाखे मात्र दो घंटे शाम 8:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक ही जलाने की अनुमति दी गई थी। सीसीएल केंद्रीय अस्पताल नईसराय प्रशासक सह नेत्र विशेषज्ञ डॉ नागेंद्र पंडित ने कहा कि त्योहारों पर प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता है। त्योहार के अवसर पर आतिशबाजी के साथ बचाव भी जरुरी है। खुले में लोगों काे सांस लेने से बचे और मास्क का उपयोग करें । ताकि दूषित हवा शरीर के अंदर प्रवेश कर हानि नहीं पहुंचा सके। इसके अलावा आंख को भी बचाने की जरुरत है।

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