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रांची के लिए अच्छी खबर:शहर के बड़े अस्पतालों में कम होने लगी कोविड के मरीजों की भीड़, AHPI ने कहा- मई के आखिर तक रांची में स्थिति बेहतर होने की उम्मीद

रांची2 महीने पहले
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एक महीने में केवल रांची में ही 1,147  ऑक्सीजन बेड तैयार किए गए हैं। वहीं लगभग 500 से ज्यादा आईसीयू बेड तैयार किए गए हैं। (फाइल) - Dainik Bhaskar
एक महीने में केवल रांची में ही 1,147  ऑक्सीजन बेड तैयार किए गए हैं। वहीं लगभग 500 से ज्यादा आईसीयू बेड तैयार किए गए हैं। (फाइल)

रांची के लिए अच्छी खबर है। रांची में संक्रमितों की संख्या कम होने के साथ-साथ मरीजों के ठीक होने की रफ्तार भी बढ़ रही है। इसके साथ ही सरकारी तैयारियां भी अब नजर आने लगी हैं। इसी का नतीजा है कि निजी अस्पतालों में जिस तरह एक सप्ताह पहले तक बेड के लिए कोहराम मचा रहता था। अब यहां स्थिति नियंत्रित होती दिख रही है।

एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI ) के झारखंड चैप्टर के प्रेसिडेंट योगेश गंभीर ने बताया कि रांची में संक्रमितों की संख्या में 60 फीसदी की गिरावट आई है। एक सप्ताह पहले तक यहां 1700 तक मरीज मिल रहे थे जो अब घटकर 1000 के नीचे चला गया है। उन्होंने बताया कि ये एक अच्छी और बड़ी वजह कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने बताया कि मई के आखिर तक स्थितियां बेहतर होने की उम्मीद है।

सरकारी स्तर पर भी तेजी सेे बढ़ाए गए बेड
योगेश गंभीर ने बताया कि मरीजों का ग्राफ नीचे आने के साथ-साथ सरकारी स्तर पर तेजी से बेड की संख्या बढ़ाई गई हैं। एक महीने में केवल रांची में ही 1,147 ऑक्सीजन बेड तैयार किए गए हैं। वहीं लगभग 500 से ज्यादा आईसीयू बेड तैयार किए गए हैं। फिलहाल रंची में 2360 ऑक्सीजन सपोर्टेड और 810 आईसीयू बेड हैं। 12 अप्रैल तक रांची के निजी व सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन युक्त सिर्फ 943 और आईसीयू बेड की संख्या 338 थी।

खेलगांव में मेडिका के हॉस्पिटल खोलने का प्लान टला
रांची में लगातार मरीजों की संख्या को देखते हुए निजी अस्पातल सरकार के साथ मिलकर अस्थाई कोविड हॉस्पिटल तैयार करने पर विचार कर रही थी। रांची के रातू रोड में प्रॉमिस हेल्थकेयर की तरफ से इसकी शुरुआत भी हुई थी। मेडिका खेलगांव में बड़े स्तर पर इसे खोलना चाह रहा था। कुछ होटल को भी कोविड हॉस्पिटल में बदलने की तैयारी थी। लेकिन मरीजों की संख्या कम होने के साथ ही इसे कम कर दिया गया है।
निजी अस्पताल संचालकों ने कहा- बेड डिस्ट्रिव्यूशन से बनी बात
मेडिका प्रंबधन ने कहा ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड के लिए आने वाले मरीजों की संख्या पिछले एक सप्ताह में 50 फीसदी से कम हो गई है। पहले जो भीड़ रहती थी वो अब धीरे-धीरे कम हो रही है। देवकमल हॉस्पिटल के डायरेक्टर अनंत सिन्हा ने कहा कि आईसीयू के लिए अभी भी परेशानी हो रही है लेकिन ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड का डिस्ट्रिव्युशन हो जाने से भीड़ कम हो गई है। हालांकि एक्सपर्ट कहते हैं कि झारखंड में अभी भी दूसरी लहर का पीक आना बाकी है।

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