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टीका ही किरण:रांची की 70% आबादी को लगे वैक्सीन तो बनेगी हर्ड इम्युनिटी, मौजूदा रफ्तार से इसमें 8 साल लग जाएंगे

रांची22 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • राजधानी की आबादी करीब 31 लाख, 45+ में अब तक सिर्फ 47,380 को दोनों डोज, 18+ में 35,712 हुए कवर
  • यह करना होगा- रोज 5 हजार को दूसरा डोज लगे तो 1 साल में लक्ष्य होगा पूरा, अभी रोज औसतन 693 काे ही लग रहा

राजधानी रांची में वैक्सीन की रफ्तार धीमी है। वैक्सिनेशन शुरू होने के पांच महीने बाद भी अब तक कुल आबादी के करीब 3% लोगों को ही टीका लगा है। वैक्सिनेशन के तय मानकों के अनुसार दोनों डोज लेने के बाद ही कंप्लीट डोज माना जाता है। रांची में पहले डोज की रफ्तार तो ठीक है, पर बूस्टर डोज यानी दूसरे डोज की रफ्तार काफी धीमी है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच महीनों में जहां पहला डोज 3,30,717 लोगों को पड़ चुका है, वहीं, दूसरा डोज सिर्फ 91,286 लोगों को ही लगा है। यह कुल आबादी का सिर्फ 2.92% है। रांची जिले की आबादी करीब 31 लाख है। 18 से नीचे आयु वर्ग वालों की आबादी करीब 9.5 लाख, 18 से 44 आयु वर्ग के 13.9 लाख और 45+ की आबादी करीब 7.5 लाख है। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी के लिए कम से कम 70% आबादी को वैक्सीन लगाने की जरूरत है। पर, यहां जिस गति से वैक्सिनेशन चल रहा है ऐसे में इतनी आबादी को वैक्सीन लगने में करीब आठ साल लग जाएंगे। यदि गति 10 गुना बढ़े तो 15 माह में कुल आबादी की 70% यानी 21.7 लाख लोगों को वैक्सीन लग सकती है।

और... फ्रंटलाइन वॉरियर्स

रांची में अब तक 43906 फ्रंट लाइन वर्कर्स काे दूसरा डोज भी लग गया है। इसमें 25640 हेल्थ वर्कर और 18266 फ्रंट लाइन वर्कर्स शामिल हैं। इन्हें मिलाकर रांची में अबतक 91286 लोगों का वैक्सिनेशन पूरा हो गया है। फ्रंट लाइन वर्कर्स में 18 से 44 आयु वर्ग के लोग भी शामिल हैं।

2 बड़ी चुनौतियां

18 प्लस के लिए कम पड़ रहे डोज

केंद्र ने राज्यों पर 18 प्लस वालों की जिम्मेवारी थोप दी। राज्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को ऑर्डर कर रहे हैं, लेकिन जितनी मांग है, उसके अनुसार टीके मिल नहीं रहे हैं। आलम यह है कि झारखंड ने 50 लाख टीकों का ऑर्डर दिया था, पर करीब 10% ही मिल पाए। बाकी डोज मिलने का समय तय ही नहीं। इस कारण टीकाकरण में देरी हो रही है।

​​​​​​​45+ वालों में अफवाह से भ्रम की स्थिति

रांची के आसपास के इलाकों में वैक्सिनेशन की शुरुआत में लोगों ने टीके लिए। लेकिन टीके लगवाने के बाद कुछ लोग बीमार पड़ने लगे। गांवों में अफवाह फैल गई टीके की वजह से ही लोग बीमार पड़ रहे हैं। इसलिए टीके लगवाने से डरने लगे। जिन्होंने पहला डोज लिया था वे भी दूसरा डोज लेने नहीं आए।

  • राजधानी के स्टॉक में अभी कुल 45000 डोज हैं। जो गति है, उस हिसाब से 8-10 दिन में वैक्सीन की कमी होने लगेगी।
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