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संवेदना खत्म:हाईकोर्ट- सैंपल बचाकर सड़ा रहे हैं? सिविल सर्जन में संवेदना खत्म हो गई है, इस्तीफा देकर घर क्यों नहीं जाते

रांची5 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • सिविल सर्जन बोले- रिम्स ने कोरोना जांच का सैंपल लेने से मना कर दिया है। इस पर रिम्स के माइक्रोबायलाॅजी विभाग के अधिकारी ने कहा कभी भी सैंपल लेने से मना नहीं किया है। हमलोग सैंपल मांग रहे हैं...

झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड में बढ़ते कोरोना संक्रमण पर चिंताते हुए सैंपल लेने के बावजूद जांच नहीं करने पर स्वास्थ्य पदाधिकारियों को फटकार लगाई। कहा- राज्य में संक्रमण के कारण युद्ध जैसे हालात हो गए हैं। इससे निपटने के लिए सरकार स्तर पर बहुत तेजी दिखानी होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने रांची में सैंपलों की जांच नहीं होने पर रांची सिविल सर्जन डॉ. विजय बिहारी प्रसाद की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की।

कहा- सैंपल बचाकर क्या कर रहे हैं? उसे सड़ा रहे हैं? जांच रिपोर्ट आने तक तो लोग मर जाएंगे और कितनों लोगों को संक्रमित भी कर देंगे। रांची सिविल सर्जन में संवेदना खत्म हो गई है। अब कोई शर्म नहीं बची है। ऐसे अधिकारियों को जब काम नहीं करना है तो इस्तीफा देकर घर क्यों नहीं चले जाते? इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि रांची सिविल सर्जन ऑनलाइन जुड़कर रोजाना होने वाली कोरोना जांच की जानकारी कोर्ट को देंगे।

सिविल सर्जन ने खंडपीठ को बताया कि रिम्स ने कोरोना जांच का सैंपल लेने से मना कर दिया है। इस पर खंडपीठ ने रिम्स के माइक्रोबायलाॅजी विभाग के अधिकारी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया। माइक्रोबायलाजी के अधिकारी ने बताया कि रिम्स ने कभी भी सैंपल लेने से मना नहीं किया है। बल्कि हमलोग सैंपल मांग रहे हैं। भले ही हमारे यहां पांच हजार सैंपल जांच के लिए लंबित हैं। तीन आरटीपीसीआर मशीन से रोजाना 1200 से ज्यादा लोगों के सैंपल लिए जाते हैं। चीफ जस्टिस ने पूछा कि लंबित जांच पूरी करने के लिए कितनी मशीनें चाहिए। इस पर रिम्स की ओर से बताया गया कि दो आरटीपीसीआर मशीन और मैनपावर की जरूरत है। कोर्ट के लोगों के साथ ऐसा व्यवहार तो स्थिति समझी जा सकती है। दरअसल, हाईकोर्ट से जुड़े लोगों का सैंपल पांच अप्रैल को लिया गया था, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं दी गई है। हाईकोर्ट ने कहा- जब कोर्ट के लोगों को साथ ऐसा किया जा रहा है, तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार होता होगा, इससे भली-भांति समझा जा सकता है।

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