कोरोना राेगियों से मनमानी सामान्य रोग में आनाकानी:दूसरे गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे अस्पताल, कह रहे-कोरोना से बेड फुल

रांची6 महीने पहले
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  • 1. हाईकाेर्ट के आदेश के बाद भी अस्पताल प्रबंधन कितने बेड हैं और कितने खाली हैं। इसका डेटा क्याें नहीं दे रहे?
  • 2. अन्य बीमारी के रोगियों काे भी हाॅस्पिटल में इलाज का अधिकार है फिर प्रशासन ने इसकी व्यवस्था क्यों नहीं की?

राजधानी में हेल्थ सिस्टम बेपटरी हो गया है। एक अाेर काेराेनाकाल में निजी अस्पताल संचालक इलाज के नाम पर मनमानी कर रहे हैं, ताे दूसरी ओर सरकारी अस्पताल की अव्यवस्था मरीजों की जान ले रही है। अभी इनका पूरा ध्यान सिर्फ काेराेना संक्रमितों पर है। अगर आप दूसरी बीमारी से पीड़ित हैं, ताे आप भगवान भरोसे ही हैं।

इसका कारण है कि राजधानी से लगभग सभी निजी और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर न तो दूसरे रोगों से पीड़ितों का इलाज कर रहे हैं और न उन्हें गंभीर स्थिति में भर्ती लिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के भय से अस्पतालों के ओपीडी बंद हैं। अगर किसी अस्पताल की इमरजेंसी में गए तो, वहां परेशानी पूछकर दवा देकर घर भेज दिया जाएगा। रिम्स जैसे संस्थान भी सामान्य मरीजों को कोरोना की रफ्तार थमने के बाद ही अस्पताल आने की सलाह दे रहे हैं।

केस - 1- सेवा सदन, दोपहर 12:25 बजे

कुएं में गिरने से सिर में चाेट लगी, सेवा सदन में सिटी स्कैन हुआ पर डाॅक्टर ने नहीं देखा

सिल्ली का नरेन्द्र महताे (14) मंगलवार की सुबह कुएं में गिर गया। परिजनों ने कई अस्पतालों का चक्कर लगाया, लेकिन कहीं भी डाॅक्टर देखने के लिए तैयार नहीं हुए। भास्कर रिपोर्टर मरीज काे लेकर सेवा सदन पहुंचा। यहां मरीज के ब्रेन का सिटी स्कैन किया गया, लेकिन इमरजेंसी में बैठे डाॅक्टर ने मरीज काे देखने से मना कर दिया। उन्होंने न्यूरो के डॉ तरुण अड़ुकिया से संपर्क करने के लिए कहा। कई बार फाेन करने के बाद भी डाॅ अड़ुकिया ने फाेन नहीं उठाया।

अस्पताल का पक्ष

प्रशासन ने कोविड-19 हॉस्पिटल घोषित किया गया है, इसलिए सामान्य रोगियों को भर्ती नहीं लिया जा रहा है। पर सर्जरी का केस होने पर मरीज को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।

अरुण छावछरिया, सचिव

केस -2-रिम्स, दोपहर 1:30 बजे

सेंट्रल इमरजेंसी चालू, पर न्यूरो के गंभीर मरीजों को भी दवा देकर अगले माह आने को कह रहे डॉक्टर

बालूमाथ के मरीज रामचंद्र कुशवाहा के ब्रेन में खून जमा हो गया है। पिछले दो महीने से परेशान हैं। डेढ़ माह पूर्व रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था। ब्रेन की सर्जरी होनी थी। लेकिन तब ऑपरेशन के उपयोग में आने वाले उपकरण खराब होने के कारण घर भेज दिया गया। दो महीने बाद आने को बोला गया। बुधवार को स्थिति काफी बिगड़ गई। रिम्स आने पर इमरजेंसी में डॉक्टरों ने कोरोना के कारण दवाई लिखकर फिर घर जाने को कह दिया गया।

अस्पताल का पक्ष...

कई वार्डो में कोरोना संक्रमित भर्ती हैं। इस वजह से ओपीडी मरीजों की भर्ती में रोक लगाई गई है। लेकिन गंभीर मरीजों का इमरजेंसी में इलाज हो रहा है।

डॉ डीके सिन्हा, पीआरओ

केस - 3- सदर अस्पताल, दोपहर 2:40 बजे

तुपुदाना के रहने वाले रामप्रवेश गुप्ता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें किडनी की समस्या पहले से है। बुधवार को उनको डायलिसिस करना था और ब्लड प्रेशर भी हाई था। वे सदर अस्पताल पहुंचे। वहां स्थिति खराब होती देख इमरजेंसी में तैनात नर्स ने उनका इलाज किया। ऑक्सीजन दिया और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए इंजेक्शन दिया। हालत स्थिर होने के बाद कोविड अस्पताल होने के कारण दो घंटे में उन्हें छोड़ दिया गया।

अस्पताल का पक्ष

सदर अस्पताल फिलहाल कोविड अस्पताल बन गया है। अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों का यहां उपचार नहीं किया जा रहा है। ओपीडी भी बंद है।
-डॉ एसएस मंडल, उपाधीक्षक

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