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  • In Corona, Thirst Too Thirsty… 80% Of The Dam Has Very Less Water, Jharkhand Has Received 69 Mm Less Rain Than Normal.

बादलों को ताक रहे जलाशय:कोरोना में कंठ भी प्यासे... 80% डैम में बहुत कम पानी, झारखंड में सामान्य से 69 मिमी कम बारिश हुई है

रांचीएक दिन पहले
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हटिया डैम
  • आधा मानसून बीता, फिर भी 69 मिमी कम बारिश
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कोरोनाकाल में झारखंड के ज्यादातर जलाशयों के कंठ भी प्यासे हैं। 16 डैम-तालाबों के जलस्तर पर नजर डालने पर सिर्फ 18.75% ही खतरे के निशान पर हैं या करीब आ गए हैं। बाकी 81.25% जलाशय में बहुत कम पानी है। अधिकतर में 34 फीट तक पानी कम हैं। प. सिंहभूम का पनसुवा डैम तो कुल क्षमता से 113.3 फीट दूर है। मौसम विभाग के अनुसार, झारखंड में सामान्य से 69 मिमी कम बारिश हुई है।

अब तक 530 मिमी बारिश राज्य में होनी चाहिए थी। रांची के कांके डैम को छोड़कर हटिया और रूक्का पर्याप्त जलस्तर से पीछे हैं। सबसे बुरी स्थिति तो हटिया डैम की है। आधा मानसून बीत चुका है, लेकिन हटिया डैम में 14 फीट ही जलस्तर है। हालांकि, जलाशयों के भरने या नहीं भरने के पीछे कैचमेंट एरिया भी मुख्य कारण है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार बारिश अच्छी हो रही है।

मलय और लमटिया डैम ओवरफ्लो, कांके डैम भरने से 2.6 फीट ही दूर
पलामू का मलय और लातेहार का लमटिया डैम लबालब भरा हुआ है। पलामू में 196 मिमी अधिक बारिश हुई है। लातेहार में सामान्य 518 मिमी बारिश की जगह 717 मिमी हो चुकी है, जिससे लमटिया डैम भी ओवरफ्लो हाे रहा है। वहीं रांची का गोंदा डैम लबालब होने से मात्र 2.6 फीट दूर है।

हटिया को लेकर चिंता, कैचमेंट इलाकों में अच्छी बारिश जरूरी
गेतलसूद (रूक्का) और गोंदा डैम में पानी भंडारण को लेकर चिंता नहीं है। अगस्त-सितंबर में अच्छी बारिश हुई तो गेतलसूद डैम भी भर जाएगा। संकट केवल हटिया डैम को लेकर है। डैम के कैचमेंट एरिया स्वर्णरेखा नदी और नगड़ी में बारिश अच्छी जरूरी है। -केके वर्मा, एसई, रांची

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