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फैसले का समय:झारखंड में मंत्रियों के लिए नए बंगले बनाना ठीक, लेकिन आम लोगों के आवासों पर भी नजर-ए-इनायत जरूरी

रांची7 महीने पहलेलेखक: संतोष चौधरी
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स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के लिए बनने वाले बंगले का डिजायन। - Dainik Bhaskar
स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के लिए बनने वाले बंगले का डिजायन।
  • VIP मामला: मंत्री आवास 9 माह में कैबिनेट से मंजूर, 24 माह में बन जाएंगे
  • आम आदमी का उदाहरण: इस्लाम नगर में जिन्हें उजाड़ा उन्हें 24 महीने में देने थे फ्लैट, 6 साल में भी नहीं मिले

धुर्वा में बन रही स्मार्ट सिटी में झारखंड के 11 मंत्रियों के लिए बंगले बनाने की कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। अब अगले माह टेंडर जारी होगा। मात्र 9 माह में मंत्रियों के बंगले के लिए जमीन चिन्हित करने, डीपीआर बनाने से लेकर इसकी तकनीकी स्वीकृति कैबिनेट से मंजूर हो गई। अगले दो वर्ष यानी 24 महीने में बंगला बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

मंत्रियों के बंगले का प्लान फास्ट ट्रैक पर चल रहा है, जबकि आम लोगों के आशियाने का प्लान कछुआ चाल से भी धीमा है। इसका उदाहरण इस्लाम नगर है। वर्ष 2011 में इस्लाम नगर में पॉलिटेक्निक की जमीन पर बने करीब 800 घर उजाड़े गए थे।

हाईकोर्ट के आदेश पर नगर विकास विभाग ने वर्ष 2015 में इस्लाम नगर में 444 परिवार के लिए फ्लैट बनाने की योजना बनाई। 24 महीने देर से 2017 में निर्माण शुरू हुआ। 24 महीने में प्रभावित परिवारों को फ्लैट बनाकर दे देना था, पर आज तक नहीं मिले। आज भी ये परिवार इस्लाम नगर में ही झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। यह बताता है कि 24 महीने के मायने आम और खास के लिए अलग है। वहीं, आम लोगों को अपने सपनाें का आशियाना नसीब नहीं हो रहा। दो दशक में झारखंड आवास बोर्ड एक भी नई कॉलोनी नहीं बना पाया है।

खास के लिए- बंगले के सपने फास्ट ट्रैक पर दौड़ने लगे, 24 महीने के मायने, आम आदमी के लिए घरौंदा- कछुए से भी धीमी चाल

  • 11 सितंबर 2020 को सीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में 7 एकड़ जमीन पर 12 मंत्रियों के बंगले बनाने का निर्णय लिया गया।
  • नवंबर 2020 में नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको ने मंत्रियों के बंगले बनाने के लिए कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया शुरू की।
  • 18 दिसंबर 2020 को 9 कंसल्टेंट ने प्रजेंटेशन दिया। 6.97 एकड़ जमीन पर कंपनियों की ओर से अलग-अलग बिल्डिंग का डिजाइन दिखाया गया।
  • 21 जनवरी 2021 को फिर तीन कंपनियों ने प्रजेंटेशन दिया। इसमें मास एंड वायस कंपनी का डिजाइन अिधकारियों को पसंद आया।
  • जुलाई 2021 में मंत्रियों के बंगले की डीपीआर तैयार हो गई। दो माह में ही तकनीकी स्वीकृति भी मिल गई।
  • 21 अक्टूबर 2021 को कैबिनेट ने 69.90 करोड़ रुपए की लागत से बंगला बनाने की मंजूरी दे दी।

सवाल: आम लोगों के घर का सपना कब पूरा होगा?

सचिव: रुके प्रोजेक्ट शुरू करने का दिया है आदेश

मंत्रियों के लिए बंगले बनाने के फैसले के बाद दैनिक भास्कर ने राज्य के नगर विकास सचिव विनय चौबे से पूछा कि आम लोगों के घर का सपना कब पूरा होगा? उन्होंने बताया कि रांची सहित राज्य में जितने भी आवासीय प्रोजेक्ट रुके हुए हैं, उन्हें शुरू करने का आदेश दे दिया गया है।

साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले आवास का निर्माण भी अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस्लाम नगर के प्रभावित परिवारों काे फ्लैट नहीं मिलने के सवाल पर उन्होंने बताया कि वहां काम शुरू करा दिया गया है। राज्य में आवासहीनों को दो साल में घर देने का लक्ष्य सुनिश्चित किया गया है।

इस्लाम नगर के प्रभावितों को घर देने के निर्णय में ही लग गए 3 साल, इसके 3 वर्ष बाद फ्लैट बनने हुए शुरू

  • मई 2011 में इस्लाम नगर से 800 से अधिक परिवारों को उजाड़ा गया।
  • जून 2012 में हाईकोर्ट ने उसी स्थान पर घर बना कर देने का आदेश दिया। दो वर्षों तक नगर निगम सर्वे करता रहा।
  • नवंबर 2014 में नगर विकास विभाग यहां 444 फ्लैट बनाने को तैयार हुआ।
  • अगस्त 2015 में पीएम आवास योजना के तहत 444 फ्लैट बनाने की मंजूरी दी गई। इसके बाद टेंडर जारी हुआ।
  • 2017 में इस्लाम नगर में निर्माण शुरू हुआ, पर अभी भी 70% काम पूरा नहीं।
  • अब इसकी योजना बदल गई है। 444 की जगह 263 फ्लैट ही बन रहे हैं। शेष परिवारों को आवास मिलेगा या नहीं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

इनका भी लंबा इंतजार

  • 1. विस्थापितों को: स्मार्ट सिटी एचईसी से खरीदी गई जमीन पर बन रही है। जिन रैयतों की जमीन एचईसी के लिए ली गई थी, उनके वंशजों के लिए आनी गांव में 2018 में 400 घर बने, पर अब तक नहीं दिए गए। घर कबाड़ बन रहे।
  • 2. बेघरों को: पीएम आवास योजना के तहत 2015 में राज्यभर से 1.98 लाख लोगों ने आवास के लिए आवेदन दिया। वर्टिकल तीन में करीब 15600 बेघर चिन्हित किए गए, जिन्हें तुरंत आवास चाहिए था। पर, 5 वर्षों में मात्र दो स्थान पर 360 फ्लैट ही बने।
  • 3. आवास बोर्ड से आस लगाए लोगों को: आवास बोर्ड ने रांची में 20 वर्षों में कोई नई कॉलोनी नहीं बनाया है। पिछले 5 वर्षों में 170 फ्लैट ही बनाए। पर, प्राइवेट बिल्डरों से फ्लैट का रेट अधिक रखने पर रांचीवासियों ने इसमें रुचि ही नहीं दिखाई।
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