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रेप का मुकदमा:आरपीएफ अफसर के घर आदिवासी बच्ची से रेप के आरोप में, जवान बर्खास्त

रांची2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • न पीड़िता का मेडिकल कराया, न ही आरोपी पर रेप का मुकदमा
  • उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त के घर में ही है पीड़िता, पुलिस रेस

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त मो. साकिब के आवास पर आरपीएफ जवान ने 14 साल की आदिवासी लड़की के साथ दुष्कर्म किया। इस मामले में पीड़िता की मेडिकल जांच और प्राथमिकी दर्ज कराए बिना ही आरोपी जवान शंभुनाथ ठाकुर पर विभागीय कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलने के बाद चुटिया पुलिस रेस हो गई है। वरीय पुलिस अधिकारियों को घटना की सूचना दे दी गई है।

घटना सेरसा स्टेडियम, चुटिया के सामने स्थित रेलवे के ऑफिसर्स गेस्ट हाउस की है। उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त मो. साकिब के अनुसार, पीड़िता उनके घर में अक्टूबर-2020 से रह रही है। वह उसे पढ़ाने-लिखाने के लिए रखे हुए हैं। जवान शंभुनाथ कुछ माह से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था, लेकिन जून की शुरुआत में उन्हें घटना की जानकारी मिली। जब उन्होंने पीड़िता को डरी-सहमी देखा और विश्वास में लिया तो उसने बताया कि शंभुनाथ ने उसके नहाते व कपड़ा बदलते फोटो-वीडियाे लिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी और उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। इसके बाद उस पर कार्रवाई की गई।

आरपीएफ अफसर बोले- लड़की की मानसिक स्थिति ठीक नहीं, इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं कराई

मो. साकिब ने बताया कि पीड़िता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए अभी प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। लड़की की काउंसिलिंग की जा रही है। जैसे ही उसकी हालत बेहतर होगी, केस दर्ज कराया जाएगा। नाबालिग को अपने घर में रखे जाने के सवाल पर कहा कि पीड़िता के माता-पिता की सहमति के बाद उन्होंने उसे पढ़ाने के लिए घर में रखा है।

आरोपी बोला- आरोप गलत, कोई भी जांच के लिए तैयार

आरोपी जवान शंभुनाथ ने कहा कि वह वर्ष 2016 से गेस्ट हाउस में ड्यूटी कर रहा है। वहां एक-पांच की फोर्स हमेशा तैनात रहती है। वह भी उसी फोर्स का हिस्सा है। जिस आरोप में उसे बर्खास्त किया गया है, वह निराधार है। कोई भी जांच कराने के लिए वह तैयार है। लड़की उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त मो. साकिब के घर में नौकरानी का काम करती है।

आज पीड़िता से मुलाकात कर सकती है सीडब्ल्यूसी

चुटिया थाना प्रभारी रवि ठाकुर ने बताया कि पूरे मामले से सीनियर अफसरों को अवगत करा दिया गया है। चूंकि मामला आदिवासी नाबालिग लड़की का है, इसलिए सीडब्ल्यूसी ही पूछताछ करेगी। मंगलवार को कमेटी इस मामले में पीड़िता से मुलाकात कर सकती है। यह मामला काफी गंभीर है, इसलिए हर बिंदु पर जांच की जाएगी।

बड़ा सवाल
1. आरपीएफ के उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त कह रहे कि लड़की को वह पढ़ाने के लिए रखे हैं, जबकि वहां ड्यूटी पर तैनात आरोपी जवान ने नौकरानी बताया है।
2. इतने बड़े अफसर होने और कानून की जानकारी होने के बावजूद पीड़िता का मेडिकल टेस्ट क्यों नहीं कराया? थाने में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज क्यों नहीं कराया गया?
3. इतने बड़े मामले में बिना प्राथमिकी दर्ज कराए विभागीय कार्रवाई कैसे शुरू कर दी गई?

केस क्याें नहीं कराया, जांच की जा रही- मंयक श्रीवास्तव, आरपीएफ आईजी, पूर्व-मध्य रेलवे हाजीपुर

उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त माे. साकिब ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए केस क्याें नहीं किया?
-इस मामले में जांच चल रही है।

जांच किस रैंक के अधिकारी कर रहे? जांच में काैन-काैन शामिल हैं?
- मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक की महिला अधिकारी कर रही हैं।

बिना जांच रिपाेर्ट मिले ही आराेपी काे बर्खास्त किया गया। यह सही है?
-अगर आराेप गलत हुआ ताे जवान काे वापस नाैकरी पर रखा जाएगा।

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