कोरोना इफेक्ट / राज्य के जेलों से फिलहाल नहीं छोड़े जाएंगे कैदी, उच्च स्तरीय कमेटी का फैसला

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • हर सप्ताह होगी कमेटी की बैठक, आकस्मिक स्थिति में लिया जाएगा कैदियों को मुक्त करने का निर्णय

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 07:23 PM IST

रांची. राज्य के जेलों से किसी भी कैदी को कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर नहीं मुक्त किया जाएगा।। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश् पर राज्य में गठित उच्च स्तरीय कमेटी यह निर्णय लिया है। गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक जस्टीस एचसी मिश्रा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विचार विमर्श् में यह बात सामने आई कि राज्य सरकार ने पूरे राज्य में लॉक डाउन किया है। इसके अलावा राज्य में कोरोना को लेकर कोई मामला सामने नहीं आया है। साथ ही जेलों में कोरोना को लेकर पूरी जागरुकता के साथ काम किया जा रहा है। 

कैदियों की कोर्ट में सीधी पेशी भी बंद कर दी गई है। उनकी पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की जा रही है। इतना ही नहीं जेलों में साफ-सफाई की व्यवस्था पर पूरी तरह से ध्यान दिया जा रहा है। वहां सेनेटाइजर का भी उपयोग किया जा रहा है। नए कैदियों को भी पूरी जांच पड़ताल और कोरोना को लेकर दूरी बनाते हुए रखा जा रहा है। ऐसे में फिलहाल जेलों से कैदियों को छोड़ने का निर्णय उचित नहीं है। सारी वस्तु स्थितियों पर विचार करने के बाद यह तय किया गया कि फिलहाल कैदियों को मुक्त करने का मामला स्थगित रखा जाए। इसी आलोक में कैदियों अभी नहीं छोड़ने का निर्णय लिया गया है। 

दूसरे जेलों में शिफ्ट किए जाएंगे कैदी
उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक लगातार होती रहेगी और आकस्मिक स्थिति में ही कैदियों को मुक्त करने का निर्णय लिया जाएगा। वर्तमान में यह समीक्षा की जाएगी कि कितने जेल में जरूरत से ज्यादा कैदी हैं, उन्हें कोर्ट के परमिशन से दूसरे जेलों में शिफ्ट किया जा सकता है। वैसे सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने के पहले इस दिशा में राज्य के जेल आईजी ने बेहतर काम किया था। उन्होंने कोर्ट के आदेश पर 1316 कैदियों को दूसरे जेलों में पहले ही शिफ्ट कर दिया जिसकी सराहना सुप्रीम कोर्ट ने की है। 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश 
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस की रोकथम और इससे निबटने के लिए गत सोमवार को देश के सभी राज्यों को आवश्यक निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में राज्य में प्रदेश स्तरीय कमेटी का गठन करते हुए राज्य के जेलों में बंद कैदियों को भी समीक्षा के बाद पेरोल पर या अंतरिम जमानत पर छोड़ने के लिए विचार करने को कहा गया था। ऐसे कैदियों को छोड़ने पर विचार करने को कहा गया था जो या तो विचाराधीन कैदी हों या जिन्हें एक साल से लेकर सात साल तक की सजा मिली है। या फिर सात साल तक की सजा के अलावा आर्थिक दंड लगाया गया हो। या फिर सिर्फ आर्थिक दंड ही लगाया गया हो। 

सुप्रीम कोर्ट ने उच्चस्तरीय कमेटी को यह अधिकार दिया कि वह कैदियों की हिस्ट्री की समीक्षा के बाद उन्हें पेरोल पर या अंतरिम जमानत पर मुक्त करने का निर्णय ले सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड में भी राज्य स्तरीय हाई लेबल कमेटी गठित की गई। इसमें राज्य स्तरीय विधिक सेवा संगठन झालसा के चेयरमैन को ही कमेटी का भी चेयरमैन माना गया और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और आईजी जेल को सदस्य बनाया गया। इसी कमेटी ने बैठक कर गुरुवार को कैदियों को फिलहाल न छोड़ने का निर्णय लिया है। 

राज्य में कैदियों की संख्या 18274 और क्षमता 16014
राज्य में कुल 29 जेल में हैं। इनमें सात सेंट्रल जेल, 14 जिला जेल, एक ओपन जेल और अन्य सबजेल हैं। इन जेलों की कुल क्षमता करीब 16 हजार 14 कैदियों की है। जबकि इन जेलों में वर्तमान समय में करीब 18 हजार 274 कैदी हैं। इनमें से विचाराधीन कैदियों की संख्या 12484, सजायाफ्ता कैदियों की संख्या 57900 है। सात साल या इससे कम की सजा वाले कैदियों की संख्या 997 और सात साल तक सजा पाने वाले विचाराधिन कैदियों की संख्या 2027 है जबकि सात साल से ज्यादा दस साल तक की सजा पाने के संभावित कैदियों की संख्या 783 है।

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