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मर्डर का आरोपी RIMS से फरार:दुमका जेल से इलाज के लिए रिम्स ICU में किया गया था एडमिट, रिम्स सुरक्षा प्रभारी ने कहा- नहीं थी कैदी की कोई जानकरी

रांची19 दिन पहले
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रिम्स के पास 100 से अधिक निजी सुरक्षाकर्मी हैं। इसके अतिरिक्त 100 के करीब सैप के जवान हैं। (फाइल) - Dainik Bhaskar
रिम्स के पास 100 से अधिक निजी सुरक्षाकर्मी हैं। इसके अतिरिक्त 100 के करीब सैप के जवान हैं। (फाइल)
  • शनि‍वार सुबह करीब 4 बजे ही वह बेड में बंधे रस्सी को खोल कर हथकड़ी समेत भाग निकला

रिम्स की सुरक्षा में एक बार फिर कैदी ने सेंध लगा दी है। दुमका से इलाज के लिए रिम्स लाया गया मर्डर का आरोपी सिद्धेश्वर रमैया नाम का कैदी शनिवार सुबह फरार हो गया। 4 फरवरी को अचानक पेट दर्द की समस्या के बाद उसे रिम्स के मेडिसिन आईसीयू में एडमिट किया गया था। यहां डॉ. सीबी शर्मा की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था। उसे मेडिसिन आईसीयू के बेड नंबर 3611 पर रखा गया था।

रिम्स के सुरक्षा प्रभारी अभास ने बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि रिम्स किसी कैदी का इलाज चल रहा है। ये दुमका का कैदी था और वहीं की पुलिस इसका इलाज करवा रही है। वहीं रिम्स इलाके के बरियातू थाना प्रभारी सपन महथा ने कहा कि रिम्स में सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां के सुरक्षा प्रभारी की होती है।

दो सिपाही कर रहे थे सुरक्षा
कैदी की सुरक्षा में दो सिपाही को रखा गया था। लेकिन दोनों को चकमा देकर वह शनि‍वार सुबह करीब 4 बजे ही वह बेड में बंधे रस्सी को खोल कर हथकड़ी समेत भाग निकला। उसे बेड पर नहीं देख सिपाहियों में उसकी खोजबीन शुरू कर दी। हालांकि कई घंटों बाद तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। इधर, रस्सी उसके बेड में वैसे ही बंधा हुआ है, जैसा कैदी को बांधा गया था। बरियातू टीओपी और थाना को सूचना देने के बाद पुलिस लगातार उसकी खोजबीन कर रही है।

सिटी एसपी ने कहा- जांच करा रहे हैं, दोषियों पर करेंगे कार्रवाई
सिटी एसपी सौरभ ने कहा कोई पुलिस पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई कैदी रिम्स लाया जाता है तो इसकी जानकारी वहां के सुरक्षा प्रभारी को होनी चाहिए। कैदी किस परिस्थिति में भागा है। क्या कारण है, इसके जांच की जिम्मेदारी सदर डीएसपी को दी गई है। वे मामले की जांच कर रहे हैं, इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

16 महीने पहले भी मेडिसिन विभाग से भाग चुके हैं कैदी
करीब 16 महीने पहले अक्टूबर 2019 में भी एक रिम्स के मेडिसिन आईसीयू से ही एक कैदी फरार हुआ था। रांची के बिरसा मुंडा जेल का वह कैदी हाथ से रस्सी को सरकाने के बाद वह खिड़की से कूद कर भाग निकला था। दिन भर इसकी खोजबीन के बाद भी वह हाथ नहीं लगा था।

रिम्स में 100 से ज्यादा निजी सुरक्षाकर्मी की है तैनाती
रिम्स के पास 100 से अधिक निजी सुरक्षाकर्मी हैं। इसके अतिरिक्त 100 के करीब सैप के जवान हैं। बरियातू टीओपी में पुलिस कर्मियों की बंदोबस्ती है। बावजूद इस तरह की घटना रिम्‍स में अक्सर हो रही है।

रिम्स से कैदियों के फरार होने के प्रमुख मामले

केस 1
16 मई 2018 को जरीया कटरमाली निवासी हत्यारोपी बुधराम उरांव रिम्स से पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया था। उसके खिलाफ बेड़ो थाने में हत्या के दो मामले और आ‌र्म्स एक्ट का एक मामला दर्ज है। धुर्वा पुलिस ने गिरफ्तार कर उसे जेल भेजा था। बाद में बेड़ो पुलिस ने रिमांड पर लेकर दोबारा जेल भेजा था। बेड़ो पुलिस के मुताबिक वह कुख्यात अपराधी था। जेल में पैर टूट जाने की वजह से उसे रिम्स के सर्जरी वार्ड में भर्ती कराया गया था।

केस 2
24 जनवरी 2018 को रिम्स में इलाजरत कैदी पिंटू बाथरूम की खिड़की तोड़कर फरार हो गया था। वह डालटेनगंज का रहनेवाला है। उसे चोरी के मामले में डालटेनगंज पुलिस ने जेल भेजा था।

केस 3
2 जनवरी 2017 को दुमका जेल का सजायाफ्ता कैदी राजेश यादव मेडिसिन आईसीयू वार्ड से भाग निकला था। वह बिहार के जमुई जिले के कल्याणपुर सिमरतला का रहने वाला था। हत्या मामले में वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे जॉंन्डिस के इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था।

केस 4
23 मई 2014 को चतरा मंडल कारा का कैदी रामस्वरुप भारती फरार हो गया। वह रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती था। उसके सिर में ट्यूमर था, 28 अप्रैल 2014 को उसका ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद वह भाग निकला था।

केस 5
2 जून 2016 को इटावा के मैनपुरी जिला जेल से इलाज के लिए रिम्स भेज गया कैदी यादवेंद्र फरार हो गया था।

केस 6
15 मार्च 2009 को रिम्स के कैदी वार्ड में इलाजरत चार खूंखार अपराधी एक साथ फरार हो गए थे। फरार होने वालों में एक नक्सली तेज नारायण गोप, हत्याकाड का सजायाफ्ता कैदी च्योति लागुड़ी, हत्या का आरोपी रवींद्र सिंह और रामविलास सिंह उर्फ लैला था। इनमें च्योति और रवींद्र को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा रांची से और रामविलास को गोड्डा उप कारा से और तेज नारायण गोप को सिमडेगा जेल से इलाज के लिए रिम्स भेजा गया था। सभी कैदी बाथरुम का ग्रिल तोड़कर भाग निकले थे।

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