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  • Jharkhand's Planning Policy Canceled, The Court Said It Is Wrong To Give 100% Reservation, Said To Give Reservation Up To 50%

फैसला:झारखंड की नियोजन नीति रद्द, कोर्ट बोला- 100% आरक्षण देना गलत, 50% तक आरक्षण देने की कही बात

रांचीएक महीने पहले
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  • हाईकोर्ट ने कहा... राज्य सरकार नौकरियों में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दे सकती है
  • तर्क...नीति संविधान के अनुरूप नहीं, इससे एक जिले के पद खास लोगों के लिए हो रहे आरक्षित
  • असर... 8423 शिक्षकों की नियुक्तियाें के लिए दोबारा विज्ञापन निकलेगा, 11 जिले रहेंगे बेअसर

झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में बनी झारखंड की नियोजन नीति को गलत बताते हुए रद्द कर दिया है। सोनी कुमारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एचसी मिश्रा, जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस दीपक रौशन की पूर्णपीठ ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इंदिरा जयसिंह और चेबरुलू लीला प्रसाद बनाम आंध्र प्रदेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले काे आधार बनाते हुए कहा कि सरकार नौकरियों में 50% से अधिक आरक्षण नहीं दे सकती। जबकि यहां 13 जिलों को शिड्यूल डिस्ट्रिक्ट घाेषित किया गया, जहां तृतीय और चतुर्थवर्गीय पदाें पर शत प्रतिशत सीटें स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दी गईं। यह गलत है।

संविधान की धारा 14,15 और 16 का भी उल्लंघन है। कोर्ट ने माना कि नौकरियों में जिले को शिड्यूल क्षेत्र घोषित करने का अधिकार गवर्नर को नहीं है, पर 14 जुलाई 2016 को राज्यपाल के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना में 13 जिलों को शिड्यूल जिला घोषित कर दिया। यहां नियुक्तियाें में आरक्षण तय किए गए। स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखने का तर्क भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।

13 शिड्यूल जिले में फिर से होगी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
इसी मामले में शिक्षक नियुक्ति के उम्मीदवारों के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने बताया कि कोर्ट के फैसले से शिड्यूल जिले के 8423 टीजीटी शिक्षकों के पद पर अब दोबारा नियुक्तियां होंगी। इसमें उन छात्रों को उम्र सीमा में रियायत दी जाएगी जिन्होंने पिछली परीक्षा में हिस्सा लिया था। अन्य 11 जिलों में हुईं नियुक्तियां जो लगभग नौ हजार हैं वे इस फैसले से अप्रभावित रहेंगी।

जानिए...कोर्ट में कैसे पहुंचा नियोजन नीति का पूरा केस
वर्ष 2016 में हाईस्कूल के 18584 पदाें पर शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद नियाेजन नीति बनी। इसके अनुसार परीक्षा में आवेदन नहीं कर पाने पर पलामू की सोनी कुमारी ने वर्ष 2017 में नीति को चुनौती दी। इसके बाद काेर्ट ने यह मामला पहले डबल बेंच में भेजा। बाद में खंडपीठ ने इसे तीन जजों की पूर्णपीठ में भेज दिया। 21 अगस्त को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।

अब आगे...सुप्रीम कोर्ट या नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया
महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि जजमेंट की काॅपी देखने के बाद सरकार निर्णय लेगी। सरकार चाहे ताे सुप्रीम काेर्ट जा सकती है या फिर नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया प्रांरभ कर सकती है। 2016 में तृतीय और चतुर्थ पदों पर नियुक्ति के लिए नीति बनी थी। इसमें शिड्यूल जिलों की नौकरी में सिर्फ उसी जिले के निवासियों को ही नियुक्त करने का प्रावधान था।

पूर्व सरकार के बुरे कार्य का नतीजा लोग भुगत रहे

हाईकोर्ट के फैसले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पूर्व सरकार के बुरे कामों का बुरा नतीजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिड्यूल और नॉन शिड्यूल एरिया बताकर झारखंड को बांटने की तैयारी थी। राज्यपाल के हाथों सब कराया गया। पूर्व सरकार इसपर जवाब दे।

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