विशेष सहायता:केंद्रीय करों में बढ़ी झारखंड की हिस्सेदारी, हर माह 300 करोड़ की दर से हो रही वृद्धि

रांची2 महीने पहले
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झारखंड की आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। इससे अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलने का भरोसा जगा है। कोरोना संक्रमण के दौर में भी आर्थिक स्थिति में मिले सुधार के संकेत केंद्रीय करों में बढ़ी झारखंड की हिस्सेदारी ने दी है। जानकारी के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष (2021-22) के प्रथम तिमाही (अप्रैल से जून तक) में जहां केंद्रीय करों में झारखंड की हिस्सेदारी औसतन 1295 की थी, जुलाई में इसमें 277 करोड़ की वृद्धि हुई है।

जुलाई में केंद्रीय करों में झारखंड की हिस्सेदारी 1295 करोड़ से बढ़कर 1572 करोड़ रुपए हो गई है। लगभग 300 करोड़ रुपए प्रति माह की दर से हो रही यह वृद्धि 3200-3400 करोड़ रुपए से अधिक होने की संभावना है। यह झारखंड के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए काफी बेहतर माना जा रहा है। क्योंकि, कोरोना काल में जहां उद्योग, व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, उसमें यह इजाफा मायने रखता है।

फिर भी बजट घोषणा से कम
हालांकि, अभी भी केंद्रीय करों में झारखंड की हिस्सेदारी राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में की गई घोषणा से कम है। राज्य सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के आम बजट में केंद्रीय करों से 22010 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान किया गया है। इस दृष्टि से राज्य को प्रति माह 1835 करोड़ रुपए मिलने चाहिए। लेकिन, अभी यह राशि 1295 करोड़ से बढ़कर 1572 करोड़ तक ही पहुंची है। अभी भी अनुमान से लगभग 263 करोड़ रुपए प्रति माह कम है।

15वें वित्त आयोग की अनुशंसा से हिस्सेदारी बढ़ी
केंद्रीय बजट 2020-21 में केंद्रीय करों से मिलने वाले पैसे में राज्य की हिस्सेदारी 0.213 प्रतिशत बढ़ी है। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर केंद्रीय करों में पिछले वर्ष की तुलना में झारखंड की हिस्सेदारी में करीब 3000 हजार करोड़ की वृद्धि का अनुमान था। लेकिन, 21669.5 करोड़ की ही प्राप्ति हुई। लेकिन, इस वृद्धि के पीछे एनके सिंह की अध्यक्षता वाले 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा प्रमुख है। क्योंकि, आयोग की अनुशंसा के कारण लगभग 0.213 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई।

केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी का फार्मूला, कुल राजस्व में से राज्यों का हिस्सा लगभग 41 प्रतिशत

केंद्र सरकार द्वारा वसूली की जानेवाली करों में राज्यों को भी हिस्सेदारी दी जाती है। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुरूप राज्यों को करों से प्राप्त कुल राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 41 प्रतिशत तय की गई है। इसके अलावा कई अन्य मानकों के आधार पर राज्यों को केंद्र सरकार से विशेष सहायता की जाती है।

उसमें किसी राज्य की जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन एवं पारिस्थितिकी, वित्तीय प्रबंधन, राज्य के नागरिकों के होनेवाली आय में अंतर व अन्य शर्तें शामिल हैं। अगर, किसी भी राज्य में गरीबों की संख्या, उसका क्षेत्रफल व जनसंख्या ज्यादा है, तो उसे विकसित राज्यों की तुलना में कुछ अधिक राजस्व प्राप्त होता है। केंद्र सरकार उसे कुछ ज्यादा मदद करती है।

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