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रास चुनाव में सत्ताधारी महागठबंधन के अपने दावे:महागठबंधन को एकजुट रखना होगी बड़ी चुनौती, राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवारी को लेकर हो सकता है विवाद

रांची3 महीने पहले
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प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बजते ही सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा और उसके सहयोगी दल कांग्रेस एवं अन्य में उम्मीदवारी को लेकर मंथन शुरू हो गया। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सत्ताधारी महागठबंधन को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। दरअसल बीजेपी कोटे से खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों को लेकर एक तरफ जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा अपना उम्मीदवार खड़ा करने के मूड में है। वहीं, सहयोगी कांग्रेस ने भी अपनी उम्मीदवारी को लेकर ताल ठोक दिया है।

कुछ इस प्रकार हैं आंकड़ें

आंकड़ों पर गौर करें तो अकेले झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 30 विधायक हैं, जो एक राज्यसभा सदस्य को उच्च सदन तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त हैं। वहीं, दूसरी तरफ 17 विधायकों के साथ कांग्रेस भी जोर आजमाइश कर रही है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी अविनाश पांडेय ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार को महागठबंधन का समर्थन मिलना चाहिए। पिछले राज्यसभा चुनाव को याद करें तो कांग्रेस को इस बाबत काफी कड़वा अनुभव रहा है।

पिछले रास चुनाव में एक तरफ जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन को उम्मीदवार बनाया। वह कांग्रेस की तरफ से शहज़ादा अनवर को उम्मीदवार बनाया गया था। संख्या बल के अभाव में कांग्रेस उम्मीदवार को हार का मुंह देखना पड़ा और बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश दूसरी सीट पर विजय हुए थे।

कांग्रेस और झामुमो का अपना राग

पुराने अनुभवों के आधार पर कांग्रेस ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस बार उसके उम्मीदवार को राज्यसभा तक पहुंचाना महागठबंधन की नैतिक जिम्मेदारी होगी। इस बाबत कांग्रेस के अंदर खाने मंथन का दौर शुरू हो चुका है। वहीं, दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा की मानें तो पार्टी किसी भी हाल में एक सीट पर कंप्रोमाइज करने के मूड में नहीं नजर आ रही है।

पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा भी राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी। कुल मिलाकर देखें तो महागठबंधन की एकजुटता को बनाए रखना एक 'लिटमस टेस्ट' होगा। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इस इससे अलग 26 विधायकों के साथ अपनी उम्मीदवारी ठोक सकती है।

क्या है राज्यसभा चुनाव में जीत के आंकड़े

फिलहाल राज्यसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार 28 प्रथम वरीयता के मत हासिल करने वाले उम्मीदवार के लिए उच्च सदन जाने का रास्ता साफ होगा। वहीं, दूसरी वरीयता के कैलकुलेशन में जोड़-तोड़ हो सकती है। हालांकि बीजेपी के साथ आजसू के दो विधायक भी शामिल है। ऐसे में बीजेपी अंदरखाने सत्ताधारी महागठबंधन से ज्यादा कंफर्टेबल महसूस कर रही है।

झारखंड में हैं कुल 6 राज्यसभा सीटें

दरअसल, झारखंड में कुल 6 राज्यसभा सीटें हैं। जिनमें से दो के लिए 10 जून को मतदान होना है बाकी के 4 में से दो बीजेपी के कोटे में हैं और दो अन्य में से एक पर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस का कब्जा है।