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  • Linear Accelerator Machine That Had Been Damaged For One And A Half Years Has Been Repaired, Cancer Patients Will Save One To One And A Half Lakh In A Month

मिलेगी सुविधा:डेढ़ साल से खराब पड़ी लीनियर एक्सीलेटर मशीन ठीक हुई, कैंसर मरीजों का महीने में एक से डेढ़ लाख बचेगा

रांचीएक महीने पहले
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  • वॉल्यूमैट्रिक माड्यूलेटेड आर्क थेरेपी से कैंसर मरीजों को साइड इफेक्ट भी कम होगा
  • मरम्मत के बाद एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड से मिला लाइसेंस- अब नि:शुल्क होगी रेडियोथेरेपी
  • नई मशीन भी खरीदने की स्वीकृति जीबी से मिल चुकी है

रिम्स में आंकोलॉजी विभाग के खुलने से मरीजाें का इलाज के लिए बाहर जाना लगभग 50% तक कम हो चुका है। यहां कैंसर रागियों के लिए जरूरी जांच की मशीन पिछले डेढ़ साल से खराब थी, लेकिन इसकी मरम्मत कराकर रिम्स प्रबंधन ने गरीब व असहाय रोगियों को सौगात दी है।

कैंसर विभाग में स्थापित लिनियर एक्सीलेटर मशीन की मरम्मत करा दी गई है। सोमवार को रिम्स प्रबंधन ने विज्ञप्ति जारी कर उपकरण के संचालन संबंधित जानकारी दी। बताया कि मशीन मरम्मत के बाद लाइसेंेस रिनुअल के लिए एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड में आवेदन किया गया था, जहां से अप्रूवल मिलने के बाद सोमवार से मशीन रोगियों के लिए शुरू कर दी गई है।

अब रिम्स में कैंसर से ग्रस्त मरीजों की रेडियोथेरेपी की सुविधा मिलनी शुरू हो गई है। वॉल्यूमैट्रिक माड्यूलेटेड आर्क थेरेपी (वीमैट) से मरीजों को साइड इफेक्ट भी कम होगा। इस नई व्यवस्था के तहत मरीजों के रेडियोथेरेपी में समय भी कम समय लगेगा।

थेरेपी पांच सप्ताह चलता है- एक महीने का खर्च एक से डेढ़ लाख : किसी भी कैंसर रोगियों को रेडियोथेरेपी के पांच सेशन लेने होते हैं। हर सप्ताह इसकी पांच थेरेपी लेनी होती है। एक माह में मरीज को रेडियोथेरेपी का खर्च करीब एक से डेढ़ लाख आता है। जबकि, रिम्स में थेरेपी लेने वालों को बिल्कुल फ्री सुविधा मिलेगी। रेडियोथेरेपी के बदले शुल्क नहीं चुकाने होंगे।

एक और एडवांस मशीन जल्द होगी इंस्टॉल : आंकोरेडियाेलॉजी विभाग में सालों से खराब पड़ी मशीन की मरम्मत कर उसे शुरू कर दिया गया। इसके अलावा एक नई एडवांस लिनियर एक्सीलेटर मशीन भी विभाग में जल्द इंस्टॉल होगी। जीबी से नई मशीन खरीद के लिए पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। प्रक्रिया में समय लग रहा है। हालांकि रिम्स प्रबंधन के अनुसार, दो माह के भीतर नई मशीन रिम्स पहुंच जाएगी। इसके बाद ज्यादा रोगियों को इसका लाभ मिल सकेगा।

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