दीवाली खास:महुआडांड़ : प्रखंड में धूमधाम से मनी दीपावली, दूसरे दिन की गई गोवर्धन पूजा

महुआडांड़25 दिन पहले
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  • दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की गई

दीपावली पूजा पुरे प्रखंड में धूमधाम से मनाई गई।इस दौरान दीपावली को लेकर लोगों द्वारा अपने अपने घरों की साफ-सफाई कर आकर्षक ढंग से सजाया गया था।

लोग अपने अपने घरों में रोशन करने के लिए एक से बढ़कर एक लाइट और दिए सजाए थे,साथ ही पारंपरिक रीति रिवाज के तहत भी भारी मात्रा में मिट्टी के दीये जलाए गए थे। रोशनी की सुंदर छटा जब बिखरी तो पूरा प्रखंड चकाचौंध हो गया।

वही बच्चों व बड़ो ने भी इस मौके पैट पटाखे छोड़कर खुशियां मनाई। दीपावली पर्व को लेकर मिठाई की काफी बिक्री हुई लोग अपने घरों में जीवन भर की मिठास लाने के लिए मिठाई खरीदे और एक दूसरे को दीपावली की शुभकामना दी।

साथ ही घरों में लक्ष्मी व गणेश के पूजन के लिए घी के लड्डू खरीद कर प्रसाद चढ़ाए। पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद का वितरण कर जीवन में सुख समृद्धि की कामना की गई। दीपावली पर्व को लेकर सभी घरों में लक्ष्मी के आगमन को लेकर रंगोली का निर्माण किया गया।

बच्चियों द्वारा एक से बढ़कर एक रंगोली का निर्माण किया गया था।शाम में जब बनाए गए रंगोली में दीप जलाई गई तो रंगोली अपनी रंगत में आ गई।

प्रखंड में दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन भगवान की पूजा की गई।शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह में अमावस्या के दूसरे दिन प्रतिपदा को भगवान गोवर्धन की पूजा की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि ब्रजवासी इंद्र की पूजा करते थे, लेकिन जब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की जगह गोवर्धन पूजा करने की बात कही तो इंद्र रुष्ट हो गए और उन्होंने अपना प्रभाव दिखाते हुए ब्रजमंडल में मूसलधार बारिश शुरू कर दी।

इस वर्षा से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया और ब्रजवासियों की रक्षा की।गोवर्धन पर्वत के नीचे सात दिन तक सभी ग्रामीणों के साथ गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे।

फिर ब्रह्माजी ने इंद्र को बताया कि पृथ्वी पर भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म ले लिया है, उनसे बैर लेना उचित नहीं है। यह जानकर इंद्रदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा-याचना की।

भगवान श्रीकृष्ण ने सातवें दिन गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा। जिसे कार्तिक अमावस्या के दूसरे दिन मनाया जाता है।

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