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मामलों के त्वरित निष्पादन:एमबीए डिग्री होल्डर करेंगे न्यायाधीशों को सहयोग, जनवरी से शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया, दो साल के प्रोबेशन के बाद होंगे नियमित

रांची2 महीने पहलेलेखक: राजीव कुकरेजा
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  • राज्य के सभी सिविल कोर्ट में अब कोर्ट मैनेजर नियुक्त किए जाएंगे

राज्य के सभी सिविल कोर्ट में अब कोर्ट मैनेजर नियुक्त किए जाएंगे। कोर्ट मैनेजर मामलों के त्वरित निष्पादन के साथ ई-गवर्नेंस को तेजी से लागू करेंगे। सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देश के बाद झारखंड में सरकार ने इनकी नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इसके लिए झारखंड सरकार ने राज्य के सिविल कोर्ट मैनेजर नियुक्ति सेवा शर्त अपील नियमावली-2020 को मंजूरी दे दी है।

जनवरी से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कोर्ट में बहाल होने वाले कोर्ट मैनेजरों के जिम्मे टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट, डाटा मैनेजमेंट, ऑटोमेटेड रिकाॅर्डस, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कोर्ट रजिस्ट्रर, रसदी, सेंट्रलाइज फाइलिंग, नजारत सेक्शन, कॉपिंग सेक्शन और मालखाना समेत कई विभागों के साथ समन्वय बिठाने का काम होगा।

सिविल कोर्ट में कार्यरत उन कर्मचारियों को प्राथमिकता, जिनके पास बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री होगी

नीतिगत मामलों में कोर्ट मैनेजर का किसी तरह का नहीं होगा हस्तक्षेप

विधि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासकीय कार्यों में भी प्रधान न्यायाधीश, सत्र न्यायाधीश और न्यायायुक्तों को कोर्ट मैनेजर सहयोग करेंगे। हालांकि, नीतिगत मामलों में उनका किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होगा। दो साल के प्रोबेशन के बाद कोर्ट मैनेजरों को नियमित किया जाएगा। रेगुलर प्रमोशन के लिए पोस्ट न होने से यह सिंगल कैडर पोस्ट कहलाएगा। एमएसीपी लाभ सरकार के संकल्प के अनुसार दिया जाएगा। समय-समय पर तबादला भी होगा।

वेतनमान

छठा वेतनमान में 15600-39100 ग्रेड पे 6600 होगा

उम्र सीमा

न्यूनतम 25 साल, अधि. उम्र सीमा आरक्षण कैटेगरी में होगी

नियुक्ति और साक्षात्कार से होगी
कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर झारखंड हाइकोर्ट द्वारा की जाएगी। सिविल कोर्ट में कार्यरत उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री होगी। राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधि विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। नियुक्ति के लिए एमबीए पास और पांच साल की नौकरी का अनुभव, आईटी आदि संस्थानों का अनुभव होना जरूरी होगा। अधिकतम उम्र सीमा आरक्षण कैटेगरी में कार्मिक विभाग द्वारा तय नियम के अनुसार होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों के काम की रफ्तार को लेकर जताई थी चिंता

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों के कामकाज की रफ्तार को लेकर चिंता जताई थी। सभी राज्यों को अदालती कामकाज में तेजी लाने के उदेश्य यह निर्देश दिया था कि न्यायालयों में प्रशिक्षित कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति की जाए। अब नियमावली बन जाने के बाद कोर्ट में एमबीए की डिग्री रखने वाले मैनेजरों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। इनकी नियुक्त होने के बाद कामकाज में भी तेजी आएगी।

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