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डॉक्टर्स डे पर विशेष / मिलिए कोरोना को हराने वाले 70 से अधिक उम्र के उन बुजुर्गों से...जिनके लिए डॉक्टर वाकई भगवान हैं, बोले-दवाओं से ज्यादा डॉक्टर्स की हौसलाअफजाई ने जान बचाई

Meet the elderly people over 70 who defeated Corona ... for whom doctors are truly God, the doctors cheered more than drugs - saved lives
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Meet the elderly people over 70 who defeated Corona ... for whom doctors are truly God, the doctors cheered more than drugs - saved lives

  • डॉक्टरों के सेवाभाव और समाज के लिए उनके त्याग के सम्मान में यह दिवस मनाया जाता है

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 05:12 AM IST

रांची/धनबाद/बोकारो. 1 जुलाई को पूरे भारत में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। डॉक्टरों के सेवाभाव और समाज के लिए उनके त्याग के सम्मान में यह दिवस मनाया जाता है और आज कोरोना के संकटकाल में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। कोरोना के मरीजों के लिए आज डाॅक्टर्स वाकई भगवान का रूप हैं और इस बात को उन बुजुर्ग मरीजों से बेहतर कोई नहीं जानता जिन्हें तमाम बीमारियों और अधिक उम्र के बावजूद डॉक्टर्स ने कोरोना के काल से बचा लिया। मिलिए कोरोना को हराने वाले 70 से अधिक उम्र के कुछ चुनिंदा मरीजों और जानिए वह अपने डॉक्टर्स के बारे में क्या सोचते हैं..

77 वर्षीय मरीज बोलीं-पहले से ही कैंसर था...मैंने तो उम्मीद छोड़ दी थी

धनबाद के झरिया अंचल में जामाडोबा बाजार में रहने वाली 77 वर्षीय सतनाम कौर (बदला हुआ नाम) का कैंसर का इलाज चल रहा था, इसी के लिए बेटे के साथ मुंबई गईं थीं। लौटीं तो वह और बेटा दोनों कोरोना पॉजिटिव निकले। कहती हैं-मैंने तो उम्मीद छोड़ दी थी, मगर डॉक्टरों ने कहा कि हिम्मत मत हारना। अस्पताल में सभी मेरा पूरा ख्याल रखते थे...क्या खाने का मन यह तक पूछते थे। अभी भी डॉक्टर हमसे फोन पर सम्पर्क में रहते हैं। हम उनकी सलामती के लिए हमेशा प्रार्थना करते हैं।

मुझे लगा था अब अंत समय आ गया डॉक्टर, स्टाफ सभी ने हौसला बढ़ाया

रांची के एलएफ रोड हिंदपीढ़ी के 74 वर्षीय मो एकराम (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि कोरोना पॉजिटिव का जब उन्हें सूचना दी गई तो लगा कि अब अंत समय है। उम्रदराज लोगों के लिए कोरोना का मतलब तयशुदा और दर्दनाक मौत। रिम्स पहुंचते ही मेरा यह डर गायब हो गया। 14 दिनों तक भर्ती रहने के दौरान यहां पर डॉक्टर, स्टाफ सभी ने मेरा हौसला बढ़ाया। मुझे निराश नहीं होने दिया। जब भी मेरा हौसला टूटता, तो सभी आकर कहते थे कि आपको हारना नहीं है...आपको कोरोना से जीतना है।

कोरोना को हराने वाले 70 साल के बुजुर्ग बोले- डॉक्टर ही भगवान हैं

इटकी को 70 वर्षीय शेख जमाउद्दीन (बदला हुआ नाम) बताते है कि शुरुआत में थोड़ी घबराहट थी। उन्हें डायबिटीज और ब्लड प्रेशर है। स्टोन का  इलाज कराने गया था तो कोरोना की जांच हुई। पता चला कि मैं पॉजिटिव हूं। सुना था कि 60 उम्र से ज्यादा के लोगो में कोरोना ज्यादा घातक है। लेकिन डॉक्टरों ने हौसला बढ़ाया और फिर सब कुछ सामान्य होता चला गया। डाक्टर की हर बात मानी और आठ से 10 घंटे की पूरी नींद ली। अस्पताल के नर्सों ने परिवार के सदस्य की तरह देखभाल की।

डॉक्टरों की वजह से आज अपने परिवार के साथ हूं

रांची के हिंदीपीढ़ी के ही 70 वर्षीय मो उस्मान (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि रिम्स के डॉक्टरों समेत पूरे स्टाफ की मदद से ही मैं कोरोना से लड़कर आगे बढ़ा हूं। इनके कारण ही मैं आज आपके सामने खड़ा हूं। मैं शुक्रिया करना चाहता हूं कि सभी ने मदद की। डॉक्टर और स्टाफ की मदद से ही मैं कोरोना से लड़ पाया हूं। अब मैं स्वस्थ होकर बाहर अपनी नई जिंदगी जी रहा हूं। अस्पताल में सभी का नजरिया बेहद सकारात्मक रहा। अब घर आकर परिवार से मिलना अच्छा लग रहा है।

मेरे लिए तो डॉक्टर फरिश्ता साबित हुए, उनकी वजह से ही जिंदा हूं

बोकारो के गोमिया प्रखंड अंतर्गत साड़म के चटनियाबागी निवासी 71 वर्षीय मोहम्मद आलम (बदला हुआ नाम) बोले कि काेराेना संक्रमण का पता चलते ही मैं घबरा गया। मुझे बोकारो जनरल अस्पताल लाया गया। अस्पताल के डाॅक्टर, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत ही थी कि मैं आज सही-सलामत हूं। डाक्टर मेरे लिए फरिश्ता साबित हुए हैं। डाॅक्टराें का नाम ताे याद नहीं लेकिन वो कहते थे, घबराने की कोई बात नहीं, हमलोग हैं न।

...और ये हैं इन मरीजों का इलाज करने वाले कोरोना वॉरियर्स

डॉ. यूके ओझा, पीएमसीएच धनबाद

यह केस खासतौर पर मुश्किल था। कैंसर की वजह से इलाज कठिन था। हमने इसे चैलेंज के तौर पर लिया और कोरोना को हराया।

डॉ. देवेश, कोविड19 वार्ड, रिम्स

हमारे लिए हर केस एक चैलेंज है। इन परिस्थितियों में काम में दिक्कतें भी आती हैं, मगर हॉस्पिटल का प्रेशर घर पर भी नहीं दिखा सकते।

डॉ. एचटी गुड़िया, कोविड19 वार्ड, रिम्स

पूरा दिन पीपीई किट में काम करना मुश्किल है। कई बार तो हम वाॅशरूम भी नहीं जाते क्योंकि गए तो प्रोटोकॉल के तहत पीपीई बदलना पड़ेगा।

डॉ. एके सिंह, बीजीएच, बोकारो

अधिक उम्र के मरीजों को खास देखभाल की जरूरत होती है। उन्हें इलाज के साथ-साथ सेकेंडरी इनफेक्शन से बचाना जरूरी है।

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