धोनी के लिए 'ऐसी दीवानगी देखी नहीं':हरियाणा का 18 साल का लड़का 1436 KM पैदल चलकर धोनी से मिलने रांची आया, कहा- धोनी ने सपने में आकर कहा, मुझसे मिलने रांची आओ

रांची10 महीने पहले
अजय धोनी के सिमलिया स्थित फार्म हाउस के गेट के बाहर खड़ा है।

पांव में छाले... हाथ में तिरंगा... कंधे पर क्रिकेट किट और दिल में महेंद्र सिंह धोनी से मिलने का जुनून...। इसी जज्बे के साथ हरियाणा के जलान खेड़ा से 18 साल का अजय गिल इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी से मिलने के लिए 16 दिन की यात्रा कर झारखंड के रांची पहुंच गया है।

वह कहता है कि धोनी का जबरा फैन है। धोनी एक बार उसके सपने में आए और पैदल रांची आकर मिलने को कहा। बस क्या था वह रांची की यात्रा पर निकल गया। उसने बताया कि वह धोनी से मिलकर ही यहां से वापस जाएगा।

अजय खुद को अपना जबरा फैन बताता है।
अजय खुद को अपना जबरा फैन बताता है।

जब वह इतनी दूर की यात्रा पैदल कर सकता है तो धोनी उससे मिलने के लिए 10 मिनट का समय नहीं निकाल सकते हैं? वह इसी जिद के साथ धोनी के सिमलिया स्थित फॉर्म हाउस के बाहर खड़ा है। हालांकि, धोनी रांची में नहीं हैं। वह IPL में अपनी टीम का हिस्सा बनने के लिए चेन्नई गए हैं।

नाई का काम करता है अजय, क्रिकेट खेलना चाहता है

अजय बोलता है कि उसने 12वीं पास कर लिया है। फिलहाल अपने शहर में ही नाई का काम करता है। उसने बताया- 'वह क्रिकेट खेलता है और इसी में अपना करियर बनाना चाहता है। जब से महेंद्र सिंह धोनी ने संन्यास लिया, उसने खेलना बंद कर दिया था, लेकिन अब वह उनका आशीर्वाद लेकर एक बार फिर से अपना करियर दोबारा से शुरू करना चाहता है'।

अपने टीशर्ट पर उसने धोनी से मिलने की जानकारी लिख रखी है।
अपने टीशर्ट पर उसने धोनी से मिलने की जानकारी लिख रखी है।

दो साल पहले दुकान बेचकर रांची आ गया था UP का एक फैन

इससे पहले जुलाई 2019 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रवींद्र सैनी धोनी से मिलने रांची आ गए थे। रवींद्र सहारनपुर स्थित अपनी छोटी सी दुकान बेचकर धोनी से मिलने रांची चले आए थे। वह भी दो साल तक धोनी का आशीर्वाद लेने के लिए भटकते रहे, अंतत: कामयाब हुए। मुलाकात होने पर धोनी ने भी उनकी भावना का सम्मान किया और उन्हें अपने घर पर ही गार्ड की नौकरी पर रख लिया। 2013 से 2018 तक सैनी ने यहां सेवा दी। इस दौरान वह यहां धोनी का सान्निध्य पाते रहे। बाद में मां की बीमारी के कारण रवींद्र को सहारनपुर लौटना पड़ा।