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अस्पताल प्रबंधन की भयंकर लापरवाही:म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों को रिकवरी चांस 20% बता कर, दे दी जा रही छुट्टी

रांची2 महीने पहले
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मरीजोंं ने भास्कर को बताई अपनी पीड़ा - Dainik Bhaskar
मरीजोंं ने भास्कर को बताई अपनी पीड़ा
  • ये कैसा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस?... नहीं हो रहा ऑपरेशन

म्यूकरमाइकोसिस को महामारी घोषित करने से पहले ही रिम्स को स्टेट का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घाेषित किया गया था, ताकि यहां मरीजों का बेहतर इलाज हो सके। पर अब भी मैनेजमेंट कोआर्डिनेशन गैप के कारण यहां मामूली सर्जरी से ठीक होने वाले मरीजों को भी सर्जरी से वंचित रखा जा रहा है। डॉक्टर यह कह कर मरीजों को वापस भेज दे रहे हैं कि रिकरवरी का चांस केवल 20% है।

रिम्स में शुक्रवार तक ब्लैक फंगस के 15 से ज्यादा मरीज भर्ती है। इनमें 5 से ज्यादा मरीज ऐसे हैं जिन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। नाक से साइनस निकालने तक तो फिर भी ठीक है, लेकिन आंख, जबड़ा व अन्य प्रभावित अंगोें की सर्जरी नहीं हो रही। हाई कोर्ट के दबाव के बाद गुरुवार को पहली महिला मरीज की सफल सर्जरी हुई। पर इससे पहले बाकी सभी मरीजों को सिर्फ दवाई के भरोसे छोड़ दिया गया। रिम्स से पिछले एक सप्ताह में चार रोगियों को छुट्टी दे दी गई। दैनिक भास्कर की टीम ने जब रोगी व उनके परिजनों से बात की तो पता चला कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही में कई लोग खुद छुट्टी कराकर ले गए, वहीं कुछ को जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया।

मरीजोंं ने भास्कर को बताई अपनी पीड़ा

गढ़वा से आईं मरीज सावित्री देवी-

आंखों की रोशनी चली गई, परिजनों ने ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों से कहा, तो उन्होंने बताया 80% जान जाने की संभावना है। जबरन छुट्टी मिली तो परिजन भी उम्मीद हारकर घर ले गए।

धनबाद के इजराइल अंसारी के बेटे फिरोज का आरोप

रिम्स के डॉक्टरों की लापरवाही ने पिता की स्थिति बिगाड़ी, भर्ती होने के 1 माह बाद भी ऑपरेशन नहीं... वेल्लोर में भर्ती के तीसरे दिन ही ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने निकाला जबड़ा।

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