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महंगे डीजल का रसोई पर भी पड़ा असर:105 रुपए लीटर बिकने वाला सरसों का तेल, अब 200 रु. प्रति लीटर पहुंचा

रांची18 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाला खर्च 5 रु. प्रति लीटर ज्यादा हुआ

पेट्रोल-डीजल-गैस सिलेंडर में बढ़ोतरी के साथ-साथ अब रसोई में काम आने वाला खाद्य तेल भी दिनों दिन महंगा होता जा रहा है।‌ इसकी वजह भी ट्रांसपोर्टेशन और पैकिंग के खर्च में बढ़ोतरी बताई जा रही है। दूसरा कारण देश में 70 फीसदी ऑयल की खपत हो रही है वह विदेशी पाम व सोया तेल ही है जिन के दाम भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़े हैं। खास यह है कि कोरोना में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सरसों के तेल पर ज्यादा भरोसा जताया है। कारण...सरसों के तेल में सेचुरेटेड फैट्स 6 से 7 फीसदी ही है।

2 बड़े कारण... जिसने तेल में महंगाई का फैट बढ़ाया

1. देशी खाद्य तेलों पर 5 फीसदी अधिक जीएसटी ने भी तड़का लगाया, पैकेजिंग मैटेरियल भी करीब दोगुना हुआ, 55-60 रु. वाला पैक 100 रु. का हुआ

2. सरसों के तेल में सिर्फ 5-7 फीसदी ही सेचुरेटेड फैट होता है, यह इम्यून सिस्टम के लिए बेहतर है, इसलिए कोरोना काल में इसकी खपत बढ़ी

जानिए... रांची में 2 करोड़ लाख लीटर तेल की खपत एक साल में होती है, इसमें सरसों, मूंगफली तिल्ली, सोयाबीन व रिफाइंड तेल शामिल है।

50 वर्षों में सरसों-पाम ऑयल में इतनी तेजी नहीं

किराना विक्रेता रघुवंशी स्टोर के संचालक महेंद्र ठक्कर ने बताया कि पिछले 50 वर्षों में सरसों और पाम ऑयल में इतनी तेजी कभी नहीं दिखी। पिछले साल लाकडाउन के समय सरसों का तेल 105 रुपए लीटर तक गया था। इस बार 200 रुपए पर पहुंच गया है। यही हाल सोयाबीन और सनफ्लावर तेल का है। सामान्यत 85 से 95 रुपए बिकने वाले सोयाबीन और सनफ्लावर रिफाइंड तेल 170 से 200 रुपए पहुंच गए हैं।

पाम आयल में सेचुरेटेड फैट्स ज्यादा इसलिए सेहत के लिए भी खतरनाक

फिजिशियन डॉ. पीसी झा का कहना है विदेशों से पाम आयल आयात होता है। यह केमिकल से साफ भी होता है, जो हानिकारक है। विदेशी तेलों में सेचुरेटेड फैट अधिक होता है। पामोलिन में 40% तक सेचुरेटेड फैट होता है, जबकि सरसों के तेल में 6 से 7 % ही है। शरीर अधिकतम 10% सेचुरेटेड फैट ही पचा सकता है।

पैकिंग मैटेरियल महंगा होना भी एक वजह

तेलों के थोक विक्रेता प्रदीप बजाज का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने की वजह से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च 4 से 5 रुपए किलो तक बढ़ गया है। इसके अलावा सरकार पैकिंग मैटेरियल एक्सपोर्ट कर रही है। इससे स्टील के पीपे भी महंगे हो गए हैं। पहले जो खाली पीपा 55-60 रुपए का था वह अब 100 रुपए का मिल रहा है।

अगले एक माह कीमतों में कमी के आसार नहीं

खाद्य तेलों के एक्सपर्ट मनोज छापड़िया ने बताया कि अगले एक महीने तक कीमतों में राहत की उम्मीद कम ही है। सरसों के दाम बढ़ने से सरसों तेल में तेजी है। पिछले साल की तुलना में सरसों तेल की कीमत दो गुना बढ़ गई है। इस साल देश में 1 करोड़ 20 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उत्पादन का अनुमान लगाया था। खराब मौसम के कारण 80 लाख मीट्रिक टन उपज हुई है। करीब 40 लाख मीट्रिक टन फसल खराब हो गई। कीमतें बढ़ने का एक कारण हो सकता है। इस कारण सोयाबीन के भाव में 800 से 1000 रुपए क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है।

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