बड़ा खुलासा:नक्सली पोकलेन मशीन के सिलेंडर में बारूद, डेटोनेटर और लोहे के टुकड़े भरकर बनाते हैं डायरेक्शनल बम

रांची9 महीने पहले
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  • 2009 से नक्सली बना रहे डायरेक्शनल बम, पर पहली बार इस्तेमाल 4 मार्च को किया
  • खुफिया विभाग से पता चला कि नक्सली 2009 से ही डायरेक्शनल बम बना रहे

10 लाख के इनामी नक्सली महाराज प्रमाणिक की जानकारी के लिए रांची पुलिस ने आम लोगों से सहयोग मांगा है। एसएसपी की ओर से इश्तेहार जारी करवाया गया है। इसमें महाराज प्रमाणिक व उसके दस्ते के एक अन्य सहयोगी 15 लाख का इनामी अमित मुंडा के बारे में जानकारी मांगी गई है। बताया गया है कि सरायकेला के इचागढ़ थाना क्षेत्र के दारूदा का रहने वाला महाराज प्रमाणिक उर्फ महाराज और रांची जिले के तमाड़ थाना क्षेत्र के तामरान निवासी अमित मुंडा के बारे में किसी को भी कोई जानकारी हो, तो वह सूचना पुलिस को दे सकता है।

वहीं, खुफिया विभाग से पता चला कि नक्सली 2009 से ही डायरेक्शनल बम बना रहे हैं। लेकिन, इसका इस्तेमाल पहली बार पुलिस बल पर लांजी जंगल में चार मार्च को किया गया। इससे पहले कुचाई में पुलिस ने अभियान के दौरान डायरेक्शनल बम बरामद किया था। नक्सलियों को बम बनाने के लिए बारूद व डेटोनेटर पत्थर खदान चलाने वालों से मिल रहा है। नक्सली इसे जमीन के अंदर नहीं लगाकर पेड़ या झाड़ी में प्लांट करते हैं। इसे विस्फोट कराने के लिए वे कमांड तार व बैट्री के जरिए दूर से अपने पास रखते हैं।

जानिए क्या है डायरेक्शनल बम

  • नक्सली पोकलेन मशीन का मजबूत सिलेंडर लेते हैं।
  • सिलेंडर में बारूद और डेटोनेटर के साथ लोहे का छोटा-छोटा टुकड़ा भरा जाता है, जिससे बम बन जाता है।
  • बम से तार खींच कर नक्सली पास में रखते हैं। जैसे ही जवान गुजरते हैं, उस ओर सिलेंडर का मुंह मोड़ कर विस्फोट कर देते हैं।

बम घातक इसलिए... बम निरोधक दस्ता इसे मेटल डिटेक्टर से सर्च नहीं कर सकता

जानकारी के अनुसार, यह बम घातक इसलिए है, क्योंकि अभियान के दौरान बम निरोधक दस्ता इसे मेटल डिटेक्टर से सर्च नहीं कर सकते। नक्सली इसे जवानों के मूवमेंट को देख इसका इस्तेमाल करते हैं, जैसे लांजी पहाड़ के पास किया गया। उल्लेखनीय हो कि चार मार्च को चाईबासा के लांजी पहाड़ के पास झारखंड जगुआर के जवानों पर घात लगाकर किए हमले में नक्सली महाराज प्रमाणिक के दस्ते का ही हाथ है। लांजी पहाड़ में नक्सलियों ने घात लगाकर डायरेक्शनल बम का इस्तेमाल किया था, जिसमें तीन जवान शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद अब महाराज प्रमाणिक और अमित मुंडा को तीन जिले रांची, खूंटी और चाईबासा पुलिस तलाश कर रही है।

नक्सली महाराज की तलाश में खूंटी-रांची में भी छापेमारी

खुफिया विभाग महाराज प्रमाणिक की जानकारी जुटाने के लिए खूंटी बार्डर, चाईबासा के गोइलकेरा, सोनुआ, खूंटी के अड़की बाॅर्डर, रांची में तमाड़ और अरंजा में लगी हुई है। जानकारी के अनुसार, चाईबासा के सांगाजाटा पहाड़ में प्रमाणिक नक्सलियों के कैंप में छिपा हो सकता है, जिसे घेरने के लिए जवानों को छह पहाड़ों को चढ़ना उतरना पड़ रहा है। इन पहाडों की उंचाई 100 से 150 मीटर है। इसके चारों ओर नक्सलियों ने लैंड माइंस और अब डायरेक्शन बम लगा रखे हैं।

बम निरोधक दस्ते को पावरफुल बाइनोकुलर की है जरूरत

झारखंड जगुआर में बम निरोधक दस्ते की 12 टीमें हैं। प्रत्येक टीम में छह एक्सपर्ट हैं, जो अभियान के दौरान आगे-आगे रहते हैं, ताकि बम का पता लगाया जा सके। बम निरोधक दस्ते के पास पावरफुल बाइनोकुलर भी होना चाहिए, जो दूर से ऐसे डायरेक्शनल बमों को पता लगा सके। वर्तमान में बम निरोधक दस्ते के पास जो मेटल डिटेक्टर हैं, वह काफी पुराने हैं। समय के साथ इसे बदला नहीं गया। नॉन लीनियर जंक्शन डिटेक्टर (एनएलजेडी) भी काफी पुराना है।

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