पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

2020-21 में 30 बच्चों मिले अपने:रांची में ज्यादातर लोगों ने बेटों की तुलना में बेटियों को लिया गोद, पिछले 5 साल में 19 विदेशी दंपतियों ने लड़की; तो 6 ने लड़कों को अपनाया

रांची22 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
रांची में गोद लिए बच्चों की संख्या - Dainik Bhaskar
रांची में गोद लिए बच्चों की संख्या

कोरोना महामारी से दर्जनों बच्चों के सिर से उनके माता-पिता का साया उठ गया। मगर इसी बीच अच्छी खबर यह है कि कई अनाथ बच्चों को नया घर और परिवार भी मिला। कोरोनाकाल में ही कई दंपती ने अनाथ बच्चों को गोद लिया है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (कारा) के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2020-2021 में रांची में रह रहे 30 अनाथ बच्चों को नए माता-पिता मिले।

वहीं, गोद लेने वाले परिवारों की पसंद सिर्फ लड़के ही नहीं लड़कियां भी हैं। लड़कों की तुलना में लड़कियों को अधिक लोग गोद ले रहे हैं। वर्ष 2016 से 2021 तक रांची के दत्तक ग्रहण संस्थान में रह रहे 216 बच्चों को गोद लिया गया। जिसमें 119 लड़कियां और 97 लड़के शामिल हैं। गोद लेने वालों में विदेशी दंपती भी शामिल हैं। विदेशी पैरेंट्स ने लड़कों से ज्यादा लड़कियों को पसंद किया। पिछले पांच सालों में रांची में के दाे दत्तक ग्रहण संस्थान में रह रहे 25 बच्चों को विदेश में रह रहे परिवार ने अपनाया। इनमें 19 लड़कियां और 6 लड़के हैं।

फॉर्म भरने के समय अपनी पसंद बताते हैं लोग

बच्चों को कानूनी तौर पर गोद लेने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (कारा) में आवेदन करना होता है। इसमें विदेश में रहने वाले भी आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक व्यक्ति को अपना पूरा ब्योरा देने के साथ खुद के कितने बच्चे हैं, इसकी जानकारी भी देनी होती है। लड़का चाहिए या लड़की ये भी बताना होगा। अगर च्वाइस नहीं है, तो वह लिखना होता है। इसके अलावा किस उम्र का बच्चा चाहिए। नॉर्मल, फिजिकल या मेंटल चैलेंज यह भी बताना है।

बेटियों को तरजीह दे रहे हैं दंपती

गोद लेने वाले माता-पिता बेटी को तरजीह दे रहे हैं। यह समाज का बहुत बड़ा बदलता हुआ चेहरा है। यह सुखद ट्रेंड है। दरअसल, इसके पीछे एक कारण यह भी है कि बेटी अपने पैरेंट्स से ज्यादा इमोशनली अटैच होती हैं।
रूपा कुमारी, चेयरमैन, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी

खबरें और भी हैं...