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  • Niall Da, An Accomplished Politician With A Skilled Politician, Played The Saxophone At Christmas; Wife Lata Used To Sing

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स्मृतिशेष:कुशल राजनीतिज्ञ के साथ बेहतरीन कलाकार थे निएल दा, क्रिसमस में वे सैक्सोफोन बजाते थे; पत्नी लता गाती थीं

सिमडेगा21 दिन पहले
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  • झारखंड आंदाेलनकारी और पूर्व विधायक निएल तिर्की नहीं रहे
  • 1986 में eजसू से राजनीतिक सफर शुरू किया, 2000 में बिहार सरकार में बनाए गए थे मंत्री

झारखंड अलग राज्य के आंदाेलनकारी और सिमडेगा के पूर्व विधायक निएल तिर्की (67) का बुधवार दोपहर करीब 12 बजे रांची में निधन हाे गया। उनके पुत्र विशाल तिर्की ने इसकी पुष्टि की है। वे रिम्स के ट्राॅमा सेंटर में भर्ती थे। परिजनाें के अनुसार, सांस लेने में अधिक परेशानी हाने पर उन्हें मंगलवार काे रिम्स ट्राॅमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था। निएल का दफन संस्कार गुरुवार को सिमडेगा स्थित उनके पैतृक गांव पाकड़टांड़ के खूंटी टोली कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान के साथ होगा।

जैसा कि निएल तिर्की के साथ राजनीति शुरू करने वाले काेलेबिरा के पूर्व विधायक बसंत लाेंगा ने बताया

निएल तिर्की काफी जुझारू और कद्दावर नेता थे। मेरे बड़े भाई और अभिभावक भी थे। कुशल राजनीतिज्ञ के साथ एक बेहतरीन कलाकार भी थे। गिटार और सैक्साेफाेन बजाने में बेहद निपुण थे। जब भी वक्त मिलता, वे गिटार या सेक्साेफाेन बजाना नहीं भूलते। क्रिसमस के माैके पर अक्सर निएल दा और उनकी पत्नी लता तिर्की का कार्यक्रम होता था। निएल सेक्सोफोन बजाते थे, लता गीत गाती थीं। निएल दा उसूल के पक्के थे और उससे कभी समझौता नहीं करते थे। यही कारण है कि उन्हें कई बार पार्टियां भी बदलनी पड़ी। 1986 में आजसू से राजनीतिक पारी शुरू करने के बाद वे झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में कूद पड़े। मुझे भी इस लड़ाई में बराबर का हिस्सेदार बनाया।

1990 में जब झारखंड आंदोलन चरम पर था तो निएल और मैं झामुमो में शामिल हो गए। 1995 में निएल ने सिमडेगा और मैंने कोलेबिरा से झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ा और पहली बार हम दोनों विधायक बने। इसके बाद 2000 में कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उस समय बिहार सरकार में उन्हें आदिवासी कल्याण मंत्री बनाया गया। 2005 में भी जीते, पर 2009 में भाजपा की विमला प्रधान से हार गए। बाद में वे झामुमाे में लाैट गए। इसके बाद फिर कांग्रेस ज्वाइन कर खूंटी से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में खूंटी से कालीचरण मुंडा को टिकट देने पर नाराज हाे कांग्रेस छोड़ आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस में फिर लाैट गए।

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