झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में कोविड के दवा की किल्लत:पैरासिटामोल, जिंक और कैल्शियम जैसी मामूली दवा तक उपलब्ध नहीं

रांची8 दिन पहले
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किल्लत केवल मेडिकल कॉलेजों में नहीं है, जहां से दवाओं की आपूर्ति की जाती है वहां का स्टॉक भी खाली है । - Dainik Bhaskar
किल्लत केवल मेडिकल कॉलेजों में नहीं है, जहां से दवाओं की आपूर्ति की जाती है वहां का स्टॉक भी खाली है ।

झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में कोविड के दवा की किल्लत हो गई है। यहां इसके लिए जरूरी दवा भी नहीं मिल रही है। कोविड के प्रति सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिस RIMS में कोविड के इलाज का हर प्रयोग किया जा रहा है वहीं इवरमेक्टिन, डॉक्सिसाइक्लिन, फेविपिराविर के साथ विटामिन, जिंक, कैल्शियम व सेट्रिजिन जैसी दवाएं समाप्त हैं।

यही स्थिति राज्य के अन्य बड़े मेडिकल कॉलेजों की है। आलम यह है कि RIMS, MGM, PMCH जैसे कॉलेजों में पैरासिटामोल, प्रोविडिन, आयोडिन, गार्गल व रेनीटिडीन सरीखी मामूली और अति उपयोगी दवाएं भी नहीं है।

कई जिलों में तो क्रिटिकल ड्रग्स का भी टोटा
इसका खुलासा चार दिन पहले कुछ जिलों में तो कोविड के ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर राज्य में की गई सभी तैयारियों की समीक्षा के दौरान हुआ है। इस दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक रमेश घोलप ने राज्य व जिला के पदाधिकारियों को जल्द से जल्द कमियों को दूर करने की हिदायत दी है।

कॉलेज में किल्लत जिले में भरमार
राज्य में दवा के मैनेजमेंट हो रही लापरवाही का आलम ऐसे समझिए। एक तरफ राज्य के मेडिकल कॉलेजों जहां सबसे ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं, वहां जरूरी दवाएं नहीं हैं। दूसरी तरफ कई जिलों में जहां कम मरीज भर्ती होते हैं वहां दवाओं की भरमार है।

स्टॉक में 35 में से 15 दवाएं खत्म
किल्लत केवल मेडिकल कॉलेजों में नहीं है, जहां से दवाओं की आपूर्ति की जाती है वहां का स्टॉक भी खाली है । यहां 35 दवाओं में से 15 दवाएं खत्म है।