रिम्स प्रबंधन ने संक्रमण रोकने के लिए लगाई पाबंदी:रिम्स ओपीडी में अब 1 घंटे में 10 मरीज ही देखेंगे डॉक्टर, स्थिति सुधरने तक इसी व्यवस्था में चलेगी ओपीडी

रांची11 दिन पहले
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रिम्स प्रबंधन कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए सख्त हो गया है। ओपीडी में अब डॉक्टर्स सीमित रोगियों को ही देखेंगे। एक दिन में प्रति ओपीडी में अधिकतम 60 मरीज ही चिकित्सीय परामर्श ले सकेंगे। शुक्रवार से यह व्यवस्था लागू हो गई है। प्रत्येक ओपीडी के लिए एक घंटा में सिर्फ 10 मरीजों के लिए ही पर्ची काटी जा रही है। आम दिनों में जहां डेढ़ सौ से अधिक लोग एक ओपीडी में दिखाने पहुंचते थे। वहीं, शुक्रवार को सिर्फ एक ओपीडी में 60 मरीजों को ही देखा जा सका।

इस कारण अधिकतर मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। रिम्स कर्मियों ने बताया कि करीब एक हजार मरीज बगैर दिखाए लौट गए। बता दें कि रिम्स के करीब 75 से अधिक डॉक्टर्स और 100 से अधिक स्वास्थ्य कर्मी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, इसे देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने ओपीडी में मरीजों की संख्या को सीमित कर दिया है।

बताया जा रहा है कि कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अगर ऐसे ही बढ़ती रही, तो रिम्स प्रबंधन ओपीडी को पूरी तरह बंद भी कर सकता है। लेकिन, रिम्स प्रबंधन के इस निर्णय से दूसरे रोगों के गरीब मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। क्योंकि, रिम्स में इलाज कराने आनेवाले ज्यादातर वैसे मरीज होते हैं, जो प्राइवेट अस्पतालों या डॉक्टरों के बिल चुकाने में असमर्थ होते हैं।

पहली पाली में 40 और दूसरी पाली में 20 मरीज को ही ओपीडी में मिला परामर्श, इतने ही पर्चे भी कटे

रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. डीके सिन्हा ने कहा कि अमूमन रिम्स के सभी विभागों के आउटडोर में डेढ़ सौ के करीब मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए मरीजों की संख्या कम की गई है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण से रिम्स के चिकित्सक, नर्स और स्टाफ भी अछूते नहीं हैं। यहां के सैकड़ों डॉक्टर जिसमें सीनियर रेसिडेंट, जूनियर रेसिडेंट, मेडिकल के छात्र के अलावा नर्स और स्टाफ भी संक्रमित हुए हैं। इस कारण अस्पताल में मैनपावर की कमी हो गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए रिम्स के ओपीडी में 60 मरीजों को ही डॉक्टरी सलाह की शुरुआत शुक्रवार से की गई है।

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