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निरोग करने की पहल:अब रिम्स में होगा अनुवांशिक बीमारियों का इलाज, चिकित्सकों की बैठक में लिया निर्णय

रांची9 महीने पहले
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  • थैलीसीमिया, सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों के मरीजों मिलेगी राहत
  • जून में खुलेगा जेनेटिक लैब... एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुप प्रसाद बने लैब प्रभार
  • रिम्स में निदेशक डॉ. डीके सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया निर्णय

थैलीसीमिया, सिकल सेल एनीमिया जैसी कई अनुवांशिक बीमारियों का इलाज अब रिम्स में होगा। रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह की अध्यक्षता में चिकित्सकों की गुरुवार को बैठक हुई। बैठक में रिम्स की पुरानी बिल्डिंग के चौथे तल्ले पर जेनेटिक लैब खोलने का निर्णय लिया गया। इस दौरान बायोकेमिस्ट्री विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुप प्रसाद को लैब का प्रभार दिया गया। डॉ. डीके सिंह ने बताया कि झारखंड में आनुवांशिक बीमारी से ग्रस्त मरीजों की संख्या काफी है। इस बीमारी से आने वाली पीढ़ी को बचाया जा सकेगा। इसके लिए इस लैब को शुरू किया जा रहा है। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। जून माह तक बनकर तैयार हो जाएगा। मौके पर गायनी की विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभा विद्यार्थी, पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. अरुण वर्मा और पीडियाट्रिक सर्जरी के डॉ. अभिषेक रंजन मौजूद थे।
क्या होते हैं आनुवंशिक रोग
वैसी बीमारी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होती है, उन्हें आनुवंशिक रोग कहते हैं। यह बीमारी डीएनए में गड़बड़ी के कारण होती है। यह गड़बड़ी उत्परिवर्तन यानी म्यूटेशन के कारण होती है। उत्परिवर्तन केवल एक जीन या पूरे क्रोमोजोम में होता है।
सदर अस्पताल में गर्भवती व गंभीर मरीजों के संक्रमण की जांच के लिए दो और ट्रूनेट मशीन आएगी, एक दिन होंगे 116 टेस्ट
रांची | सदर अस्पताल में 25 मई को दो और ट्रूनेट मशीन आएगी। इससे अस्पताल में तीन मशीन हो जाएगी। जांच क्षमता में 5 गुणा बढ़ोतरी होगी। वर्तमान मशीन डेढ़ घंटे में 2 सैंपलों की जांच करती है। अभी 12 घंटे में केवल 20 सैंपल की जांच हो रही है। दो और मशीन आने से 12 घंटे में 116 सैंपल की जांच शुरू हो जाएगी, क्योंकि आने वाली मशीन बड़ी है। इससे डेढ़ घंटे में 4 सैंपल की जांच होगी। दोनों बड़ी मशीन 12 घंटे में 96 और छोटी मशीन 20 सैंपल की जांच करेगी। इस तरह  12 घंटे में 116 सैंपलों की जांच होगी। सदर हॉस्पिटल के डीएस डॉ. सव्यसाची मंडल ने बताया कि सोमवार को दोनों मशीन आएगी।
हड्डी रोग का इलाज भी अब सदर में
हड्डी के इलाज के लिए आने वाले मरीजों को सदर अस्पताल अब रिम्स नहीं भेजेगा, बल्कि उनका इलाज स्वयं करेगा। डीएस डॉ. सव्यसाची मंडल ने बताया कि सदर में हड्डी की इलाज करने वाली मशीन नहीं होने के कारण यहां के डॉक्टर मरीजों का इलाज नहीं कर पाते थे और ना ही उन्हें यहां भर्ती कर पाते थे। ऐसे में मरीजों को बहुत परेशानी होती थी। अब यह समस्या दूर हो गई है। बुधवार को ही हड्डी की जांच करने वाली सी-आर्म मशीन सदर पहुंची। गुरुवार को इंस्टॉल हुआ। शुक्रवार से इलाज शुरू हो जाएगा।

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