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काम न होने से अफसर सुस्त:राज्य में अब विकास का रोना...नई योजनाएं नहीं, नीतिगत फैसले रुके

रांची10 महीने पहले
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  • कैबिनेट की बैठक हुए एक माह बीते
  • मनरेगा, गरीबों को अनाज और पीएम अावास पर सारा जोर

कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने झारखंड में सरकारी कार्यों को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऑन गोइंग स्कीम को छोड़ कर विकास की नई योजनाओं पर स्वीकृति नहीं मिल रही है। सचिवालयों व सरकारी कार्यालयों में भी काम की गति बढ़ने की जो उम्मीद बनी थी, उसे बढ़ते संक्रमण ने रोक दिया है। नीतिगत मुद्दों पर मंजूरी के लिए जरूरी कैबिनेट की बैठक हुए एक महीना बीत गया है।

मुख्यमंत्री के होम क्वारेंटाइन होने के बाद अन्य मंत्रियों ने भी सचिवालय जाना छोड़ दिया है। रोस्टर के तहत आनेवाले सहायक की अपने एसओ से, तो एसओ की अपने सहायक और अन्य कर्मियों से मुलाकात तक नहीं हो रही। नई योजनाओं और नीतिगत फैसलों के लिए न तो फाइल बढ़ रही और न उसे स्वीकृति दिलाने के लिए किसी स्तर पर सक्रियता दिख रही है। कोरोना से जुड़े कार्यों को छोड़ दें, तो सरकार के भीतर सारा काम अनमने ढंग से हो रहा है।

हर माह एक बैठक...17 जून को हुई थी कैबिनेट की पिछली बैठक

कैबिनेट की पिछली बैठक 17 जून को हुई थी। उससे पहले लॉकडाउन में 20 मई और 13 अप्रैल को बैठक हुई थी। लॉक डाउन शुरू होने से ठीक पहले 17 मार्च और उससे पहले 11 फरवरी को कैबिनेट की बैठक हुई थी। इस तरह नई सरकार में औसतन महीने में कैबिनेट की एक बैठक ही हो रही है।

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट की बैठक होती है तो विभाग विकास योजना या नीतिगत योजनाओं से संबंधित संलेख तैयार करता है। जिस पर स्वीकृति के लिए फाइल घूमती है, तो वित्त, विधि, सीएस और सीएम सचिवालय तक असर दिखता है। लेकिन न कोई फाइल बन रही है और न ही उस पर स्वीकृति लेने को अधिकारियों पर काम का कोई दबाव है।

तीन-चार कामों पर ही ज्यादा जोर

लॉक डाउन में कोरोना संक्रमण से बचाव व उपचार से जुड़े कार्यों को छोड़ दें, तो तीन-चार कामों पर ही सरकार का जोर है। प्रधानमंत्री अावास योजना, गरीबों को अनाज योजना, मनरेगा के तहत काम योजना। इसके अलावा राज्य योजना के तहत काम को छूट दिये जाने का प्रस्ताव अभी तक लंबित है। अन्य जिन योजनाओं पर काम की छूट मिली है, वे शत-प्रतिशत केंद्रीय योजनाएं हैं या केंद्र प्रायोजित योजनाएं हैं। 

सीएम के होम क्वारेंटाइन होते ही मंत्रियों ने भी सचिवालय आना छोड़ा

मुख्यमंत्री के होम क्वारेंटाइन होने के साथ ही राज्य के अन्य मंत्रियों का भी सचिवालय आना बंद हो गया है। मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव, वित्त सचिव, स्वास्थ्य सचिव, आपदा प्रबंधन सहित अन्य विभागों के सचिव या प्रधान सचिव नियमित सचिवालय आ रहे हैं। लेकिन काम में कोई गति नहीं है। नई योजनाओं या कार्यक्रमों को अंजाम देने का उन पर कोई प्रेशर नहीं है।

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