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लैंड म्यूटेशन बिल-2020:बिल पास होने पर बिना आपत्तिवाला 28 दिन और आपत्तिवाला म्यूटेशन 88 दिन में होगा

रांची8 दिन पहले
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  • धारा-22 को छोड़ लैंड म्यूटेशन बिल के अन्य प्रावधानों पर नहीं है कोई विरोध

झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल-2020 को विधानसभा से पारित कराना सरकार के लिए मजबूरी भी हो गयी थी। इसके कई कारण हैं। वर्तमान में म्यूटेशन का काम 1973 में बने कानून के तहत किया जा रहा है। उस कानून में ऑनलाइन म्यूटेशन का प्रावधान नहीं है। इसलिए ऑनलाइन म्यूटेशन को लेकर कोर्ट में वैधानिक चुनौती दी जा रही है। सुभद्रा देवी एवं अन्य बनाम राज्य सरकार के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा भी है कि क्या वह बिहार की तर्ज पर कानून बनाना चाहती है।

बिहार ने 2011 में ही 1973 से चले आ रहे कानून को संशोधित कर दिया है। इसलिए म्यूटेशन के ऑनलाइन व्यवस्था को विधि सम्मत बनाने के लिए विधेयक लाना राज्य सरकार के लिए जरूरी था। इसके अलावा म्युटेशन के लिए समय सीमा का निर्धारण भी बिल का महत्वपूर्ण प्रावधान है। राइट टू सर्विस एक्ट के तहत सरकार ने वर्षों पूर्व म्युटेशन के लिए समय सीमा निर्धारित कर चुकी है। लेकिन इसका मूल एक्ट में ही प्रावधान नहीं किया गया है। इससे भी तकनीकी परेशानी थी। अब बिना आपत्तिवाला 28 दिन और आपत्तिवाला म्युटेशन 88 दिन में करने का प्रावधान बिल में जोड़ दिया गया है।

सत्ता पक्ष के भी कई विधायक सवाल उठा रहे हैं

बिल की धारा 22 को छोड़ दिया जाए, तो इसको लेकर अब तक कोई विरोध नहीं है। धारा-22 में राजस्व पदाधिकारियों को दिये गए संरक्षण और सुरक्षा पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के भी कुछ विधायक सवाल उठा रहे हैं। लेकिन सरकार के आदेश पर भू-राजस्व सचिव केके सोन ने सोमवार को दावा किया कि सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है। धारा 22 की उप धारा 2 में गलत नीयत से काम करनेवाले राजस्व पदाधिकारियों पर कार्यवाही का प्रावधान किया गया है।

जमाबंदी को रद्द करने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी

अभी किसी रैयत के नाम से होनेवाली गलत जमाबंदी को रद्द करने की प्रक्रिया काफी लंबी है। बिहार टेनेंट्स होल्डिंग (मेंटेनेंस ऑफ रेकर्ड्स) एक्ट 1973 में जमाबंदी के निरस्तीकरण का स्पष्ट प्रावधान भी नहीं था। अब सरकार ने बिल में इसकी शक्ति अपर समाहर्ता को दी है। अपर समाहर्ता के आदेश के विरुद्ध डीसी और प्रमंडलीय आयुक्त के यहां अपील की जा सकती है।

सभी अधिकारियों के लिए जिम्मेवारी तय की गई है

म्यूटेशन के बाद दो दिनों के भीतर शुद्धि पत्र निर्गत करने की समय सीमा तय की गई है। भूमि सुधार उप समाहर्ता को 45 दिनों के भीतर अपील का निष्पादन एवं उपायुक्त अथवा अपर समाहर्ता को 30 दिनों के भीतर रिवीजन का निष्पादन करने के लिए कानूनी रूप से जिम्मेवार बनाया गया है। बिना कारण के विलंब होने पर अधिकारी जिम्मेवार होंगे।

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