कोरोना ज्यादा ताकतवर:रोज 25 गंभीर मरीजों में से सिर्फ 1 को ऑक्सीजन बेड, इस बार 10 दिन में 36 मौतें; पिछली लहर में 136 दिन लगे थे

रांची8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
एबुलेंस में मोक्ष का इंतजार, बर्निंग घाट की मशीनें खराब - Dainik Bhaskar
एबुलेंस में मोक्ष का इंतजार, बर्निंग घाट की मशीनें खराब
  • रिम्स के डॉ. प्रदीप भट्‌टाचार्य ने कहा- 60 फीसदी संक्रमित लोगों को सांस लेने में हो रही है परेशानी
  • इस बार मरने वाले अधिकांश 40 वर्ष से अधिक उम्र के भी

कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर से हर मामले में ज्यादा खतरनाक है। इसमें लोगों को संक्रमित करने की क्षमता जितनी अधिक है, उससे कई ज्यादा लोगों के शरीर को सुस्त करने की भी। दूसरी लहर में मृत्यु दर काफी बढ़ा है। क्योंकि, अस्पतालों में बेड की कमी है। औसतन देखा जा रहा है कि 25 गंभीर मरीजों को अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है, लेकिन इनमें से सिर्फ एक मरीज को ही बेड नसीब हो रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल 31 मार्च को रांची में कोरोना का पहला मामला मिला था। 31 मार्च से 14 अगस्त तक यानी 136 दिनों में रांची जिले में कुल 36 संक्रमितों की मौत हुई थी। लेकिन, इस दूसरी लहर में महज 10 दिनों में ही 36 लोगों की जान चली गई। पहले 136 दिनाें में जिन 36 लोगों की मौत हुई थी, उनमें अधिकतम संख्या 60 साल से अधिक आयु वर्ग के लोगाें की थी। इस बार 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी इस सूची में शामिल हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो यह स्थिति कुछ दिनों में और भयावह होने वाली है। पिछले 10 दिनों में जिन लोगों की मौत हुईं है, उनमें से ज्यादातर लोग मौत से 48 घंटे के पूर्व ही अस्पताल में भर्ती हुए थे।

65 से 70 तक पहुंच रहा ऑक्सीजन सेचुरेशन

रिम्स में डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, अब तक के ऑब्जर्वेशन में यह देखा गया है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद करीब 60 फीसदी लोगों को सांस की समस्या हो रही है। ऑक्सीजन सेचुरेशन में तेजी से गिरावट हो रही है। जहां औसतन ऑक्सीजन सेचुरेशन 95 से अधिक होना चाहिए, वहीं यह घटकर 65 से 70 तक पहुंच जा रहा है। ऑक्सीजन सेचुरेशन में गिरावट के कारण ही सांस की समस्या उत्पन्न हो रही है। लोगों की मौत की एक वजह यह भी है। चिकित्सक लोगों को ऑक्सीजन लेवल कम होने पर ऑक्सीजन सपोर्ट की सलाह दे रहे हैं। जबकि, गंभीर संक्रमितों को ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने में काफी परेशानी हो रही है। क्योंकि, सरकारी या निजी दोनों व्यवस्था के तहत अस्पतालों में बेड खाली ही नहीं है। वहीं बिना इसके मरीजों की स्थिति और ज्यादा बिगड़ रही है।

मरीज की परेशानी एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे

राजधानी में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित मरीजों को बेड नहीं मिलने से काफी परेशानी हो रही है। परिजन संक्रमित को लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं। रविवार को भी रिम्स से 13 गंभीर मरीजों को लौटना पड़ा। क्योंकि, ऑक्सीजन युक्त बेड खाली नहीं थे। दोपहर के बाद सर्जरी के डी-1 वार्ड में 10 ऑक्सीजन बेड बढ़ाए गए, जिसके बाद मरीजों को भर्ती लिया गया। दैनिक भास्कर को दिन भर में 20 से ज्यादा शिकायतें अस्पतालों में बेड नहीं मिलने की आई। निजी अस्पतऑर्किड, मेडिका, मेदांता, आलम, सेंटेविटा, राज, हेल्थ प्वाइंट, पल्स व अन्य अस्पतालों में भटकने के बाद भी जरूरतमंदों को जगह नहीं मिली।

जिला स्कूल-सैनिक मार्केट में जांच शुरू, आज से 9 जगहाें पर भी व्यवस्था

राजधानी में काेराेना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। चाहकर भी लोग जांच नहीं करा पा रहे हैं, क्योंकि इसके लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। रविवार को जिला स्कूल और सैनिक मार्केट परिसर में कोरोना जांच के लिए स्टैटिक टेस्ट सेंटर शुरू किया गया। वहीं, सोमवार से मारवाड़ी भवन सहित शहर के 9 स्थानाें पर स्टैटिक सेंटर शुरू होगा। लोग अपने आसपास के सेंटर में जांच करा सकेंगे। प्रशासन काे उम्मीद है कि इससे रिम्स और सदर अस्पताल में लगने वाली भीड़ काफी हद तक कम होगी। मालूम हो कि रांची व हटिया रेलवे स्टेशन, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, खादगढ़ा व आईटीआई बस स्टैंड में काेविड टेस्ट टीम को तैनात कर सैंपल कलेक्शन किया जा रहा था। रविवार को दो नए सेंटर शुरू हाेने के बाद 9 अन्य स्टैटिक सेंटर के लिए कोविड टेस्ट टीम प्रतिनियुक्त किया गया है।

आज शहर में कहां-कहां शुरू हाेंगे स्टैटिक सेंटर

  • मारवाड़ी भवन
  • कोकर इंडस्ट्रियल एरिया
  • मोरहाबादी ओपी
  • डोरंडा (शिव मंदिर के निकट)
  • स्टेशन रोड]
  • हेल्थ सेंटर धुर्वा
  • रिसालदार बाबा सेंटर
  • कांके राेड सीएमपीडीआई कैंपस
  • हटिया
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कांके
  • अनुमंडल हॉस्पिटल, बुंडू
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तमाड़
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बेड़ो
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बुड़मू
  • स्वास्थ्य केंद्र, नामकुम
खबरें और भी हैं...