तस्करी रोकने की कवायद:नशे के काराेबार में लगातार शामिल लाेग अब लंबे समय के लिए जाएंगे जेल, पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत होगी कार्रवाई

रांची21 दिन पहलेलेखक: बिनाेद ओझा
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  • सभी जिलाें के एसपी-डीसी से मांगा गया प्रस्ताव

नशीले पदार्थों के उत्पादन, व्यवसाय, तस्करी या खरीद-बिक्री में लगातार सक्रिय रहने वाले लाेगाें की अब खैर नहीं है। अपराध अनुसंधान विभाग ने ऐसे लाेगाें के प्रति अपनी नजरें टेढ़ी कर ली हैं। प्रयास यह किया जा रहा है कि राज्य में नशे के काराेबार पर ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण लगाया जा सके और काराेबारियाें, जिनमें उत्पादक भी शामिल हैं, काे लंबे समय तक जेल के भीतर रखा जा सके। नशा कारोबारियों काे लंबे समय तक जेल में रखे जाने से इस तरह के काराेबार में निश्चित रूप से असर पड़ेगा।

नशा के काराेबार में खेताें की उपज से लेकर उसकी खरीदारी कर तस्करी करने वाले नेटवर्क काे अपराध अनुसंधान विभाग निशाना बनाना चाह रहा है। इसी वजह से राज्य में ऐसे लाेगाें काे चिह्नित कर उनके विरुद्ध पीआईटी एनडीपीएस एक्ट (द प्रीवेंशन ऑफ इलीसिट ट्रैफिक इन नारकाेटिक ड्रग्स एंड साइकाेट्राेपिक सबस्टांसेस एक्ट- 1988) के तहत कार्रवाई की जाएगी। अपराध अनुसंधान विभाग ने राज्य के सभी उपायुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों काे निरुद्ध आदेश के लिए जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने काे कहा है।

एक्ट के तहत एक साल तक नहीं मिलेगी जमानत

पीआईटी एनडीपीएस एक्ट 1988 के तहत विभिन्न जिलाें के उपायुक्त और एसपी उन्हीं अभियुक्तों के नाम का प्रस्ताव भेजेंगे, जाे लगातार इस मामले में शामिल हाेते आ रहे हैं और उनको जेल में बंद करना जरूरी है। इस एक्ट के तहत अभियुक्त काे एक साल तक जमानत नहीं मिलती है। ऐसे में अगर गिरफ्तार किए गए किसी अभियुक्त के मामले में पीआईटी एनडीपीएस एक्ट 1988 के तहत प्रस्ताव आता है और वह मंजूर हाे जाता है, तब अभियुक्त काे एक साल तक जमानत मिलना मुश्किल हाेगी। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव काे ही अभियुक्त के लिए डिटेंशन अथॉरिटी नामित किया गया है।

स्वास्थ्य व अर्थव्यवस्था पर खतरा हैं ऐसे लोग

पीआईटी एनडीपीएस एक्ट 1988 के तहत बार-बार अपराध करने पर समाज के लाेगाें के स्वास्थ्य का खतरा ताे हाेता ही है। इससे सरकार की अर्थव्यवस्था भी काफी ज्यादा प्रभावित हाेती है। लाेगाें के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दाेनाें काे ही इससे खतरा है। राज्य में पिछले 5 सालों में नशीले पदार्थों के मुकदमों, गिरफ्तार अभियुक्तों की संख्या, नशीले पदार्थों की जब्ती और अफीम उपजाने के एरिया में भी लगातार हो रही है।

झारखंड के 17 जिलों के 37 थाना क्षेत्रों में अफीम की हाेती है खेती

रांची : नामकुम, बुंडू और तमाड़ थाना क्षेत्र, खूंटी : खूंटी व मुरहू थाना क्षेत्र, सरायकेला खरसांवा : चौका थाना क्षेत्र, गुमला : कामडारा थाना क्षेत्र, लातेहार : बालूमाथ, हेरहंज व चंदवा थाना क्षेत्र, चतरा : लावालौंग, सदर, प्रतापपुर, राजपुर, कुंदा, विशिष्ठनगर, पलामू : पांकी, तरहसी, मनातू, गढ़वा : खरौंदी, हजारीबाग : तातुहरिया, चौपारण, गिरिडीह : पीरटांड़, गनवा, डुमरी, लोकनयानपुर, तिसरी, देवघर : पालाजोरी, दुमका- शिकारीपाड़ा, रामगढ़, रनेश्वर, मसलिया, गोड्डा : माहेरवान, पाकुड़ : हिरणपुर, जामताड़ा : नाला, कुंडीहाट, साहेबगंज : बरहेट, तालीहारी। अफीम की खेती के लिए नक्सलियाें द्वारा ग्रामीणाें काे बीज दिया जाता है और वही खरीदार भी हैं।

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