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हाईकाेर्ट ने लगाई फटकार:लाेगों काे इलाज के लिए जमीन बेचनी पड़ेगी, सरकार क्या कर रही है- हाईकोर्ट

रांची2 महीने पहले
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हाईकाेर्ट की फटकार के बाद रिम्स के ट्राॅमा सेंटर में भर्ती उषा देवी का गुरुवार काे ऑपरेशन किया जाएगा। उनकी एमआरआई जांच कराई गई है। बुधवार काे रिम्स सुपरिंटेंडेंट विवेक कश्यप, न्यूराे सर्जन, एनेस्थिसिया, ईएनटी अाैर नेत्र विभाग के अध्यक्ष उषा देवी के पास पहुंचे। उन्हें बताया कि ऑपरेशन की पूरी तैयारी कर ली गई है। ऑपरेशन रिम्स में ही हाेगा। - Dainik Bhaskar
हाईकाेर्ट की फटकार के बाद रिम्स के ट्राॅमा सेंटर में भर्ती उषा देवी का गुरुवार काे ऑपरेशन किया जाएगा। उनकी एमआरआई जांच कराई गई है। बुधवार काे रिम्स सुपरिंटेंडेंट विवेक कश्यप, न्यूराे सर्जन, एनेस्थिसिया, ईएनटी अाैर नेत्र विभाग के अध्यक्ष उषा देवी के पास पहुंचे। उन्हें बताया कि ऑपरेशन की पूरी तैयारी कर ली गई है। ऑपरेशन रिम्स में ही हाेगा।
  • ब्लैक फंगस की मरीज उषा देवी के इलाज मामले में हाईकाेर्ट ने लगाई फटकार
  • रिम्स निदेशक से पूछा-शपथ पत्र देकर बता सकते हैं कि ब्लैक फंगस के मरीजाें काे बाहर से दवा नहीं लानी पड़ती

झारखंड हाईकाेर्ट ने ब्लैक फंगस से पीड़ित गिरिडीह की उषा देवी के इलाज के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस डाॅ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में बुधवार काे इस मामले की सुनवाई हुई। काेर्ट ने कहा-सीएम के पीएस कहते हैं कि पीड़िता का बाहर इलाज कराने के लिए फंड नहीं है। परिजन उन्हें तमिलनाडु ले जाना चाहते हैं। क्या अब हमारे नागरिक काे इलाज के लिए जमीन बेचनी पड़ेगी। चीफ जस्टिस ने कहा-अगर मेरे पास पैसे हाेते ताे मैं उस महिला की मदद करता।

काेर्ट ने सरकार से पूछा कि उस महिला के इलाज की क्या व्यवस्था की गई है। रिम्स निदेशक कामेश्वर प्रसाद से पूछा-क्या आप शपथ पत्र देकर बता सकते हैं कि ब्लैक फंगस के मरीज बाहर से दवा नहीं खरीद रहे। इस पर निदेशक ने बताया कि दवा की पूरी सप्लाई नहीं है, इसलिए शपथ पत्र दायर नहीं कर सकते। इसके बाद काेर्ट ने सरकार से पूछा कि ब्लैक फंगस काे महामारी घाेषित की गई है ताे इससे निपटने की क्या पाॅलिसी है। सरकार ने क्या कदम उठाया है, इसकी जानकारी शपथ पत्र में दे। वहीं झालसा भी बताए कि वह क्या कर रहा है।

पीड़िता के बेटे की चिट्ठी पर हाईकाेर्ट ने लिया संज्ञान

पीड़िता के बेटे ने इस संबंध में चीफ जस्टिस काे पत्र लिखकर मां काे बचाने की गुहार लगाई थी। इसी पत्र के आधार पर काेर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। बेटे ने लिखा था-मेरी मां ब्लैक फंगस से जूझ रही है। उसके इलाज के लिए बाहर से 10-10 हजार रुपए की दवा खरीदनी पड़ती है। उसका एक आंख, नाक और ब्रेन का हिस्सा बुरी तरह से प्रभावित हाे गया है। डाॅक्टर बेहतर इलाज के लिए तमिलनाडु ले जाने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि बाहर जाकर मां का इलाज करा सकूं। मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई, लेकिन उनके पीए ने कहाकि सरकार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि मेरी मां काे एयरलिफ्ट कर तमिलनाडु भेज सके। सरकार मेरी मदद नहीं कर पा रही है। काफी तनाव और घाेर चिंता के समय मुझे आपसे आस है। इस मामले में हस्तक्षेप करें।

इंफेक्शन ब्रेन तक पहुंचा

गिरिडीह के पचंबा निवासी 45 वर्षीय उषा देवी ब्लैक फंगस से पीड़ित है। 17 मई काे उन्हें इलाज के लिए रिम्स लाया गया था। लेकिन इलाज शुरू हाेने में ही दाे दिन लग गए। इलाज में देरी हाेने के कारण एक आंख में संक्रमण पूरी तरह से फैल चुका है। इंफेक्शन ब्रेन तक पहुंच गया है। मां की खराब हालत काे देखकर बेटा गाैरव और बेटी पूजा ने सरकार से मदद मांगी थी।

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