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  • Positive Signal From The Ministry Of Industry On Bank Guarantee Of 388 Crores, Every Day Top Management Officials Are Meeting And Preparing Strategy

एचईसी को कार्यशील पूंजी की कमी नहीं हाेगी:388 करोड़ की बैंक गारंटी पर उद्योग मंत्रालय से मिले सकारात्मक संकेत, हर रोज प्रबंधन के शीर्ष अधिकारी बैठक कर तैयार कर रहे हैं रणनीति

रांची4 महीने पहले
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  • जनवरी में 17 करोड़ और इस साल तक 225 करोड़ रुपए का वर्कऑर्डर पूरा कर डिस्पैच करने का लक्ष्य

एचईसी के कामगारों की 36 दिन की टूल डाउन स्ट्राइक समाप्त हाेने के बाद अब कारखाना चलाने और आगे बढ़ाने की चुनौती प्रबंधन के पास है। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए प्रबंधन जोर-शोर से कार्यादेश समय पर पूरा करा करा कर डिस्पैच करने में लगा है।

एचईसी को आगे बढ़ाने और अपने पैराें पर खड़ा करने के लिए मुख्यालय में तीनाें निदेशकाें के साथ प्लांट के अधिकारियों की प्रतिदिन मीटिंग हो रही है। प्रबंधन ने बताया कि वेल एंड हॉपर और आंकाक्षा प्रोजेक्ट के 17 कराेड़ के कुछ पेंडिंग काम काे पूरा कर इसी माह डिस्पैच किया जाएगा। इस साल 225 करोड़ रुपए का कार्यादेश पूरा कर हर हाल में डिस्पैच किया जाएगा।

निदेशक कार्मिक ने कहा- जल्द ही बैंक गारंटी मिलने की उम्मीद
हड़ताल समाप्त हाेने के बाद कामगार जी-जान से उत्पादन में जुट गए हैं। कामगार वर्कआर्डर समय पर पूरा कर डिस्पैच करने के संकल्प के साथ काम में जुटे हैं। इसे देखते हुए भारी उद्योग मंत्रालय से भी 388 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। एचईसी के निदेशक कार्मिक एसके सक्सेना ने बताया कि हमें उम्मीद है कि यह बैंक गारंटी जल्द मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि हम बैंकों से भी लगातार संपर्क में हैं।

कामगार रविवार की छुट्टी के दिन भी काम करने काे तैयार
निदेशक कार्मिक एमके सक्सेना ने बताया कि सभी कामगार और अफसर मिलजुल कर कारखाना काे आगे बढ़ाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। कामगार प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए खुद रविवार को भी सेवा देने के लिए तैयार हैं। मालूम हो कि एचईसी के पास विभिन्न प्लांटों में 1700 करोड़ रुपए का कार्यादेश है। एनसीएल के कोल हैंडलिंग प्लांट के लिए दो प्रोजेक्ट पर 265 करोड़ रुपए का काम है। इससे एचईसी को 400 करोड़ रुपए मिलेेंगे।

मजदूरों को बकाया के साथ प्रति माह सैलरी देने की चुनौती
एचईसी के पास फिलहाल कार्यशील पूंजी का अभाव है। लेकिन, प्रबंधन के अनुसार यह कमी शीघ्र दूर हो जाएगी। मजदूरों और अफसरों के वेतन मद में हर महीने 13 करोड़ रुपए का खर्च है। इसके अलावा पहले का बकाया करीब 35 करोड़ रुपए देने का भी वादा प्रबंधन ने किया है। इधर कामगार भी प्रबंधन की बातों को समझते हुए कारखाना काे बचाने के साथ-साथ आगे बढ़ाने के लिए पूरी क्षमता के उत्पादन के काम में जुट गए हैं।​​​​​​​

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