प्राथमिकता देने की तैयारी शुरू:टेंडरों में एसटी-एससी व ओबीसी काे प्राथमिकता देने की तैयारी

रांचीएक महीने पहलेलेखक: जीतेंद्र कुमार
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  • ढाई कराेड़ तक के प्रोजेक्ट पर लागू हो सकता है यह प्रस्ताव
  • ओडिशा की तर्ज पर झारखंड में लागू की जाएगी यह नीति

झारखंड सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के युवाओं को समृद्ध बनाने में जुट गई है। इन्हें कई शर्तों में छूट दी जा रही है। राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में बैठने के लिए सरकार ने झारखंड से ही मैट्रिक-इंटर पास करना अनिवार्य कर दिया है। लेकिन इस वर्ग के युवाओं को इससे छूट दी गई है।

अगर वे दूसरे राज्य से भी मैट्रिक और इंटर पास करते हैं, तो भी परीक्षा में बैठ सकते हैं। वहीं एसटी के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए मुफ्त में विदेश भेजने की व्यवस्था भी की गई है। एससी छात्रों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। इसी बीच अब ढाई कराेड़ रुपए तक के निर्माण कार्याें के टेंडरों में भी इस वर्ग के लोगों को प्राथमिकता देने की तैयारी शुरू हो गई है।

पथ निर्माण विभाग के इस प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री के रूप में हेमंत साेरेन ने सहमति दे दी है। अब कैबिनेट में रखा जाएगा। जिसकी मंजूरी मिलते ही इन्हें टेंडर में शामिल कर लिया जाएगा। ओडिशा में ऐसी ही व्यवस्था लागू है। ओडिशा की तर्ज पर ही झारखंड में भी यह नीति लागू की जाएगी। इस वर्ग के युवाओं को सिर्फ पथ निर्माण विभाग में ही नहीं, बल्कि भवन निर्माण, ग्रामीण कार्य विभाग, पेयजल स्वच्छता विभाग और जल संसाधन विभाग आदि के टेंडरों में प्राथमिकता दी जाएगी।

टेंडर दर बराबर हाेने पर आरक्षित वर्ग के युवाओं काे मिलेंगे ठेके
रजिस्ट्रेशन फीस में छूट

इस व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए एसटी-एससी और पिछड़े वर्ग के युवाओं काे रजिस्ट्रेशन कराना हाेगा। रजिस्ट्रेशन फीस में भी उन्हें 25 प्रतिशत छूट मिलेगी, ताकि युवा इसकी तरफ आकर्षित हाे सकें।

लाॅटरी भी विकल्प
ढाई कराेड़ रु. तक के टेंडर में अगर आरक्षित वर्ग के युवाओं की दर अन्य निविदादाताओं के बराबर हुई ताे ठेका आरक्षित वर्ग काे मिलेगा। वहीं आरक्षित वर्ग के ही दाे ठेकेदाराें की दर समान हुई ताे लाॅटरी से ठेके का आवंटन हाेगा।

साल में एक बार लाभ
अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग के युवाओं काे टेंडर में प्राथमिकता का लाभ साल में एक बार ही दिया जाएगा। इसका लाभ पाने के लिए उन्हें टेंडर पेपर के साथ जाति प्रमाण पत्र देना भी जरूरी हाेगा।

पहले 25 कराेड़ तक के ठेके स्थानीय काे देने का था प्रस्ताव
हेमंत साेरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद जुलाई 2020 में भी भवन निर्माण विभाग ने ऐसा ही प्रस्ताव तैयार किया था। तब 25 करोड़ रुपए तक के निर्माण कार्य का ठेका स्थानीय युवाओं को देने की तैयारी थी। भवन निर्माण विभाग के उस प्रस्ताव को भी विभागीय मंत्री ने स्वीकृति दे दी थी। इसपर कैबिनेट की मंजूरी लेनी थी, लेकिन बाद में इसे कैबिनेट में भेजा ही नहीं गया।

ढाई करोड़ रु. से कम का हाेता है करीब 90 प्रतिशत काम
झारखंड सरकार विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों का जो टेंडर निकालती है, उनमें करीब 90 प्रतिशत काम ढाई करोड़ रुपए तक का ही होता है। ऐसे में अगर एससी-एसटी और पिछड़ा वर्ग को टेंडर में प्राथमिकता मिलती है तो इस वर्ग के युवाओं को बड़ी संख्या में काम मिलेगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होगा।

झारखंड में 82% वोट बैंक एससी-एसटी और ओबीसी का

झारखंड में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग का सबसे बड़ा वोट बैंक है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में 82% वोटर इन्हीं वर्ग के हैं। इनमें सबसे ज्यादा 45% वोट बैंक पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का है। इसके बाद अनुसूचित जनजाति का 26% और अनुसूचित जाति का 11% वोट है। इसीलिए सरकार इन आरक्षित वर्ग के लोगों के लिए रोज नई-नई योजनाएं लागू कर रही हैं। क्योंकि अगर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा तो वे सत्ताधारी दल के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे। ऐसे में चुनाव में सत्ताधारी दल को भी लाभ मिलेगा।

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