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खास बातचीत / विषयों के डिपार्टमेंट की दीवार गिराकर रिसर्च को बढ़ावा देने और फिनिशिंग स्किल बेस्ड कोर्सेज शुरू करने से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

Promoting research by dropping the department's wall of subjects and starting finishing skills based courses will increase employment opportunities
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Promoting research by dropping the department's wall of subjects and starting finishing skills based courses will increase employment opportunities

  • सिदो-कान्हू मुर्मू विवि की नवनियुक्त कुलपति ने वर्तमान शिक्षा में क्या बदलाव हों, इस पर विस्तार से बात की

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 10:44 AM IST

रांची. (कुंदन कुमार चौधरी) रांची की डॉ. सोनाझरिया मिंज सिदो-कान्हू मुर्मू विवि दुमका की नई वीसी नियुक्त हुई हैं। डॉ. इंदु धान के बाद वे दूसरी आदिवासी महिला हैं, जो इस पद पर आसीन हुई हैं और संभवत: अभी देश में एकमात्र आदिवासी महिला, जो किसी यूनिवर्सिटी में कुलपति हैं। फिलहाल डॉ. मिंज जेएनयू दिल्ली में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोफेसर हैं।

प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. निर्मल मिंज की पुत्री सोना ने 1979 में संत मार्गेट स्कूल से मैट्रिक पास करने के बाद गोस्सनर कॉलेज रांची, ज्योतिनिवास कॉलेज बेंगलुरु, वीमेंस क्रिश्चियन कॉलेज चेन्नई, मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज चेन्नई से गणित में एमएससी की शिक्षा के बाद जेएनयू दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में एमफिल और पीएचडी की डिग्री ली। बतौर डेटा एनालिस्ट उनकी खास पहचान है।

यहां से निकलेगी राह... मल्टीडिसिप्लीनरी (बहुविषयी) कॉन्सेप्ट के बारे में पढ़ना होगा

अब तक हम केवल फिजिक्स, बायलॉजी या सोशियोलॉजी पढ़ते हैं, लेकिन क्या हमने कभी सोशियोलॉजी ऑफ बॉटनी पढ़ा है? मल्टीडिसिप्लीनरी (बहुविषयी) कॉन्सेप्ट के बारे में अब पढ़ना है। जेएनयू की यही खासियत है कि यहां कोई डिपार्टमेंट नहीं है, स्कूल हैं, जहां मल्टीडिसिप्लीनरी को बढ़ावा दिया जाता है। एक से ज्यादा विषयों के डिपार्टमेंट की दीवार गिराकर रिसर्च को बढ़ावा देना है। फॉर्मल एजुकेशन से सिर्फ बेरोजगारी ही बढ़ी है। वोकेशनल कोर्सेज और फिनिशिंग स्किल बेस्ड स्कूल को विवि में जगह दी जाए।

आदिवासी मॉडल अपनाकर समस्याएं सुलझेंगी : जो समाज आदिवासी को नहीं जानते, वे ही उनके लिए ‘पिछड़ा’ का प्रयोग करते हैं। पूरी दुनिया में हर जगह जनजातीय कल्चर को स्टडी किया गया है, जिसमें एक ही बात उभर कर आई है कि जनजातीय कल्चर बहुत एडवांस है। सस्टनेबिलिटी के जो मॉडल जनजातीय समाज में हैं, वह कहीं नहीं हैं।

स्पेशल सेंटर फॉर ट्राइबल रिसर्च-स्टडीज की स्थापना है सपना : आदिवासी कल्चर के तहत जो ट्रेडिशनल नॉलेज है, उसको स्थान मिले। यह तभी होगा, जब हम स्पेशल सेंटर फॉर ट्राइबल रिसर्च-स्टडीज बना सकें। इससे आदिवासी में डाल दी गई हीन भावना कि तुम कुछ जानते नहीं हो, खत्म होगी। इस सेंटर से साइंटिफिक ढंग से इन बातों को प्रजेंट किया जा सकता है। 

पलायन के पीछे सामाजिक सोच भी है : पलायन की समस्या झारखंड में 70 के दशक से ही देखी जा रही है। यहां से लड़कियों का पलायन ज्यादा हुआ, क्योंकि ऐसी मानसिकता है कि घर और जमीन तो लड़के ही देखेंगे, फिर लड़कियों को कमाने बाहर भेज दो।

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