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  • Ranchi Hill, Made Of Mud From The Big Pond, The Goddess Pavilion Was Getting Buried, The Mother Came In Palkot Raja's Dream, Then Got The Temple Established In Kishoreganj

मंदिर कथा:बड़ा तालाब से निकली मिट्‌टी से बनी रांची पहाड़ी, दबने लगा था देवी मंडप, पालकोट राजा के सपने में आईं मां, तो किशोरगंज में स्थापित कराया मंदिर

रांची20 दिन पहले
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जैसा कि मंदिर के बारे बड़ा लाल मृत्युंजय नाथ शाहदेव के परपाेते 70 वर्षीय बड़ा लाल गाेविंदनाथ शाहदेव ने भास्कर काे बताया। - Dainik Bhaskar
जैसा कि मंदिर के बारे बड़ा लाल मृत्युंजय नाथ शाहदेव के परपाेते 70 वर्षीय बड़ा लाल गाेविंदनाथ शाहदेव ने भास्कर काे बताया।
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लोगों को पानी पिलाने के लिए खुदवाया था बड़ा तालाब

वर्ष 1899 से पहले रांची, लोहरदगा जिले के अधीन था। उस समय यहां पालकोट के राजा बड़ा लाल मृत्युंजय लाल नाथ शाहदेव राज करते थे। 1857 की क्रांति के बाद रांची को तत्कालीन गवर्नर ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से बसाना शुरू किया था। लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बड़ा तालाब खोदा गया। वही मिट्‌टी आज के पहाड़ी मंदिर के स्थान पर रखी गई।

कहानी यह भी...तालाब के पानी से महामारी खत्म हुई

एक बार रांची में महामारी फैली थी। उस समय गोविंद नाथ शाहदेव के परदादा को स्वप्न आया- मां कह रही हैं कि मुझे स्थान दो। पुजारी ने बताया कि तब किशोरगंज चौक पर देवी मंडप स्थापित हुआ। मां को तालाब के जल से स्नान कराकर नगर में छिड़काव किया तो महामारी खत्म हुई।

1880 में किशोरगंज चौक पर स्थापित हुआ मंडप

पहाड़ी मंदिर के स्थान पर ही एक देवी मंडप था, जो मिट्‌टी से दब गया था। जिसके बाद मां राजा के सपने में आकर जगह मांगी। तय हुआ कि पहले से स्थापित देवी मंडप काे अब तालाब के किनारे ही स्थापित किया जाए। इसके बाद विधि-विधान से 1880 में देवी मंडप (आज का किशोरगंज चौक के पास स्थापित मंदिर) की स्थापना की गई।

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