ट्रेनों में चूहे-कॉकरोच का आतंक:पांच साल में चूहे-कॉकरोच खा गए रेलवे के 1.08 करोड़ रु., फिर भी नहीं भागे; रांची के ट्रेन यात्रियों की नींदें हराम

रांची2 महीने पहले
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काेराेनाकाल में बंद रहीं ट्रेनें, फिर भी काॅकराेच-चूहों पर 40 लाख खर्च - Dainik Bhaskar
काेराेनाकाल में बंद रहीं ट्रेनें, फिर भी काॅकराेच-चूहों पर 40 लाख खर्च

रांची डिवीजन से चलने वाली ट्रेनों में चूहे-कॉकरोच का आतंक जारी है। पिछले पांच सालों में रेलवे ने इनका सफाया करने में 1.08 करोड़ रुपए खर्च किया है, फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा है। चूहे-कॉकरोच ट्रेन यात्रियों के सामान बेखौफ कुतर रहे हैं, चट कर रहे हैं। स्थिति यह है कि सफर कर रहे यात्रियों की रात की नींदें हराम हो गई हैं।

रांची रेल मंडल के रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2017 से साल 2022 तक अब तक एक करोड़ 8 लाख 18 हजार 552 रुपए खर्च किए जा चुके हैं। उसके बाद भी चूहे और कॉकरोच की संख्या में कमी नहीं आई है। खाने की चीजों से लेकर बिस्तर तक में कॉकरोच टहल रहे हैं। हाल में ही गरीबरथ, क्रियायोग एक्सप्रेस और हटिया-पटना सहित कई ट्रेनों में चूहे-कॉकरोच की लगातार शिकायतों के बाद डीआरएम प्रदीप गुप्ता ने संबंधित एजेंसी पर एक लाख रुपए जुर्माना लगाया है।

कोरोनाकाल में बंद रहीं ट्रेनें, फिर भी कॉकरोच -चूहों पर 40 लाख खर्च

बड़ा सवाल : ट्रेनें बंद थीं, एक यात्री नहीं था तो खर्च कैसे?

कोरोनाकाल में अप्रैल 2020 से लेकर जुलाई 2021 तक ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहा। उस समय भी रेलवे ने चूहों और कॉकरोच काे मारने में 40 लाख रुपए से अधिक खर्च कर दिए। यह खर्च का आंकड़ा रेलवे के पास दर्ज है। साल 2020 और साल 2021 में 20-20 लाख यानी 40 लाख रुपए कॉकरोच व चूहों काे मारने में खर्च कर दिया। बड़ा सवाल यह है कि उस दाैरान न ताे ट्रेनों की बोगियां खुलीं और न ही साफ-सफाई हुई। एक यात्री ने भी सफर नहीं किया तो इतनी बड़ी राशि चूहों और कॉकरोच भगाने में कैसे खर्च हो गए।

सीडीओ पर जिम्मा, पर दे दिया खेल का भी प्रभार
रांची रेल डिवीजन में सबसे कोर डिपार्टमेंट का काम ट्रेनों का मेंटनेंस और साफ-सफाई पर ध्यान रखना है। इसके प्रमुख सीडीओ होते हैं। लेकिन सीडीओ को इन कामों के अलावा रेलवे के खेल विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इससे वे कोई काम पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं।

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