पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

टूटी परंपरा:कोरोना की वजह से 72 साल बाद पहली बार रांची में इस वर्ष नहीं होगा रावण दहन

रांचीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मोरहाबादी में जलता रावण का पुतला। -फाइल फोटो। मोरहाबादी मैदान में रावण दहन कार्यक्रम के लिए सांस्कृतिक टीम कोलकाता से जबकि आतिशबाजी की टीम मुंबई से आती रही है।
  • कोरोना को लेकर सरकार की गाइडलाइन को देखते हुए पंजाबी-हिंदू समाज ने लिया फैसला
  • राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में होता है झारखंड का सबसे बड़ा और भव्य रावण दहन

साल 1948 से रांची में शुरू हुए रावण दहन 72 साल के बाद पहली बार आयोजित नहीं होगा। देश के विभाजन के दौरान पाकिस्तान से रांची पहुंचे पंजाबी परिवारों ने रावण दहन की परंपरा की शुरुआत की थी। उस वक्त यहां के खिजुरिया तालाब स्थित गोस्सनर कॉलेज कैंपस के रिफ्यूजी कैंप में 12-15 पंजाबी परिवार रहते थे जिन्होंने रावण दहन की शुरूआत की थी। इसके बाद से लगातार हर साल रावण दहन किया जाने लगा। लेकिन कोरोना के चलते इस साल रावण दहन पर रोक लग गई है।

पंजाबी-हिंदू बिरादरी के प्रवक्ता अरुण चावला ने बताया कि रांची में 10 से 12 जगहों पर रावण दहन किया जाता था। इनमें सबसे बड़ा और भव्य रावण दहन रांची के मोरहाबादी मैदान में होता था। यहां रावण के पुतले की ऊंचाई 65 फीट, जबकि मेघनाथ के पुतले की 60 और कुंभकरण के पुतले की ऊंचाई 55 फीट होती है। उन्होंने बताया कि मोरहाबादी मैदान में आयोजित सबसे बड़े रावण दहन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि होते हैं। मोरहाबादी के बाद सबसे भव्य रावण दहन रांची के अरगोड़ा चौक पर होता है।

मोरहाबादी मैदान में पुतला तैयार करते कारीगर। -फाइल फोटो।
मोरहाबादी मैदान में पुतला तैयार करते कारीगर। -फाइल फोटो।

कोलकाता और मुंबई से आती है सांस्कृतिक और आतिशबाजी की टीम
अरुण चावला ने बताया कि मोरहाबादी मैदान में रावण दहन कार्यक्रम के लिए सांस्कृतिक टीम कोलकाता से जबकि आतिशबाजी की टीम मुंबई से आती रही है। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले से रावण दहन कार्यक्रम की शुरूआत हो जाती है। कुल आयोजन में 15 से 20 लाख रुपए का खर्च आता है जिसे चंदा करके इक्ट्ठा किया जाता है। चंदा में समाज के सभी वर्गों के लोगों की भागीदारी होती है।

पुतला बनाने के लिए गया से आता है मुस्लिम परिवार
रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित सबसे बड़े रावण दहन के लिए पुतला बनाने का काम बिहार के गया जिले का एक मुस्लिम परिवार करता है। अरुण चावला ने बताया कि गया के रहने वाले मोहम्मद मुस्लिम अपने कारीगर और परिवार के साथ रावण, मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला बनाने के लिए रांची आते हैं। उन्होंने कहा कि पुतला तैयार करने में करीब एक महीने का वक्त लगता है, इसलिए मोहम्मद मुस्लिम को एक महीना पहले यहां बुलाया जाता है जिसके बाद रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले को बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है।

मोरहाबादी मैदान में खड़े रावण, मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला। -फाइल फोटो।
मोरहाबादी मैदान में खड़े रावण, मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला। -फाइल फोटो।

शुरुआत के कई सालों तक रावण का मुखौटा गधे का होता था
रावण का पहला पुतला स्वर्गीय अमीरचंद सतीजा ने अपने हाथों से बनाया था। तब के डिग्री कॉलेज (बाद में रांची कॉलेज मेन रोड घर के सामने) के परिसर में 12 फीट का रावण का निर्माण किया गया था। उस वक्त रावण दहन के दौरान लगभग 400 लोगों की भीड़ थी। अरुण चावला ने बताया कि चूंकि रावण बुराई का प्रतीक माना जाता है, इसलिए रांची में रावण का मुखौटा पहले गधे का होता था लेकिन बाद में मुखौटा मानव मुख का बनने लगा। उन्होंने बताया कि हर साल रावण दहन के दौरान बढ़ती भीड़ एवं रावण के पुतलों की बढ़ती लंबाई के कारण रावण दहन कार्यक्रम डिग्री कॉलेज, खजुरिया तालाब के पास शरणार्थी शिविर, डोरंडा के राम मंदिर, बारी पार्क तथा राजभवन के सामने नक्षत्र वन में होने लगा। इसके बाद आखिरकार पुतला दहन का कार्यक्रम 1960 से मोरहाबादी मैदान में किया जाने लगा।

डेढ़ से दो घंटे में सामान्य होता है ट्रैफिक
मोरहाबादी में रावण के पुतले के दहन के दौरान रांची के अलावा आसपास के जिलों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। रावण दहन के दौरान रांची का सबसे बड़ा मोरहाबादी मैदान लोगों के भर जाता है। यहां हजारों की संख्या में लोग मौजूद होते हैं। अरुण चावला ने बताया कि अनुमान के मुताबिक, डेढ़ से दो घंटे बाद मोरहाबादी मैदान में ट्रैफिक सामान्य हो पाता है। रावण दहन के दौरान झांकियों के सवाल पर अरुण चावला ने बताया कि 72 साल के इतिहास में सिर्फ एक साल झांकियां निकाली गई है। झांकी रातू रोड से लेकर मोरहाबादी मैदान तक पहुंची थी। चूंकि सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इसे बंद करा दिया गया।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- दिन उन्नतिकारक है। आपकी प्रतिभा व योग्यता के अनुरूप आपको अपने कार्यों के उचित परिणाम प्राप्त होंगे। कामकाज व कैरियर को महत्व देंगे परंतु पहली प्राथमिकता आपकी परिवार ही रहेगी। संतान के विवाह क...

और पढ़ें