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एजी की रिपोर्ट:रिम्स डेंटल कॉलेज घोटाले के दोषियों पर होगा केस, स्वास्थ्य विभाग ने मांगे नाम और पते

रांची16 दिन पहले
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  • उपकरण खरीद में 20 करोड़ की गड़बड़ी

रिम्स डेंटल कॉलेज घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने रिम्स निदेशक से घोटाले में शामिल पदाधिकारियों के नाम, पदनाम, वर्तमान पदस्थापन का ब्यौरा मांगा है।

सेवानिवृत्ति की स्थिति में उनके पत्राचार का पता भी मांगा गया है। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव दिलेश्वर महतो की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 20 सितंबर को एजी ने रिम्स डेंटल कॉलेज में हुई खरीददारी पर स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट सौंपा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन कर बिना जरूरत के बड़ी संख्या में बाजार दर से अधिक मूल्य पर मशीनें खरीदी गई हैं। यह गंभीर प्रवृति की वित्तीय अनियमितता का मामला है।

मेसर्स श्रीनाथ इंजीनियरिंग और डीके मेडिकल्स द्वारा फर्जी कागजात के आधार पर टेंडर लेने तथा बाजार दर से अधिक पर उपकरणों की आपूर्ति करने के मामले में रिम्स को कार्रवाई करनी है। स्वास्थ्य विभाग ने इन दोनों कंपनियों पर की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है।

तत्कालीन निदेशक, एचओडी व कमेटी के सदस्यों की खोज
करोड़ों के उपकरण बिना उपयोग के ही कबाड़ बना दिए गए। स्थिति यह है कि इन उपकरण की पैकिंग तक नहीं खाेली गई है। साक्ष्य के रूप में एजी ने डिब्बों में बंद मशीनों के फोटो भी भेजे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग 2014-15 के बीच निदेशक सहित टेक्निकल कमेटी के सस्दय, फर्जी इंस्टॉलेशन सर्टिफिकेट देनेवाले एचओडी की खोज में जुट गया है।

4.25 लाख की बेसिक डेंटल चेयर 14.28 लाख में खरीदी
66 पन्ने की रिपोर्ट में महालेखाकार (एजी) ने माना है कि रिम्स डेंटल कॉलेज के लिए उपकरणों की खरीद में जमकर घोटाला किया गया है। 37.42 करोड़ की उपकरण खरीद में 20 करोड़ से अधिक के कमीशन का खेल हुआ है। 4.25 लाख में मिलने वाली बेसिक डेंटल चेयर 14.28 लाख में, तो 18 लाख की एडवांस डेंटल चेयर 42.86 लाख में खरीदी गई। 41 लाख की डेंटल मोबाइल वैन 1.48 करोड़ में खरीदी गई। बिना आवश्यकता के 110 बेसिक डेंटल चेयर और 15 एडवांस डेंटल चेयर खरीद ली।

मशीनें घटिया थीं, फिर भी अफसरों ने दिया सर्टिफिकेट
कॉलेज में सप्लाई की गई डेंटल चेयर जांच में घटिया निकली। एनआईटी के मानकों पर सप्लाई नहीं की गई। इसके बाद भी रिम्स अधिकारियों ने इंस्टॉलेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया। भौतिक सत्यापन में पाया गया कि डेंटल चेयर में कई सामान नहीं लगाए गए।

जानकारी के बाद भी बिल पास
घोटाले पर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने 12 सितंबर 2016 को रिम्स निदेशक को पत्र लिखकर आगाह किया था। तब निदेशक ने डीके मेडिकल और श्रीनाथ इंजीनियरिंग को नोटिस जारी किया। दोनों कंपनियों ने जवाब भी दिया। फिर भी निदेशक ने 5.40 करोड़ का बिल पास कर दिया।

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