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21 साल बाद तिरिल आश्रम का होगा कायाकल्प:रांची में महात्मा गांधी से जुड़े सर्वोदय आश्रम को पर्यटन और शोध केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, कुटीर उद्योग के क्रिया कलाप का हब बनेगा

रांची2 महीने पहले
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CM ने कहा कि देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें तिरिल स्थित सर्वोदय आश्रम से जुड़ीं हैं। - Dainik Bhaskar
CM ने कहा कि देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें तिरिल स्थित सर्वोदय आश्रम से जुड़ीं हैं।

21 साल बाद एक बार फिर से रांची के धुर्वा स्थित तिरल आश्रम (सर्वोदय आश्रम) का कायाकल्प होगा। गांधी जयंती पर CM हेमंत सोरेन ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी से जुड़े सर्वोदय आश्रम को संरक्षित और विकसित किया जएगा।

हेमंत सोरेन ने कहा है कि तिरिल आश्रम में संचालित छोटानागपुर खादी ग्रामोद्योग संस्थान को महात्मा गांधी के सपने के अनुरूप ढाला जाएगा। इसे कुटीर उद्योग के क्रियाकलापों का हब बनाया जाएगा। वहीं आश्रम को संरक्षित कर यहां पर्यटन और शोध केंद्र के रूप में विकसित करने का भी कार्य होगा। इससे रोजगार के नये अवसर भी बनेंगे।

इस स्थान का है ऐतिहासिक महत्व
CM ने कहा कि देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें तिरिल स्थित सर्वोदय आश्रम से जुड़ीं हैं। यहां स्वाधीनता आंदोलन की यादें हैं। तब यह आश्रम स्वतंत्रता सेनानियों का ठिकाना भी हुआ करता था। इस दृष्टिकोण से इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व भी है।

1928 में तिरिल आश्रम की स्थापना हुई थी
डॉ.राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणा से 1928 में तिरिल में इस आश्रम की स्थापना की गई थी। ये 24 एकड़ में यह फैला हुआ है। यहां पर खादी के प्रचार-प्रसार से लेकर आजादी से पहले से काम हो रहा है। राजेंद्र प्रसाद जब राष्ट्रपति बने, तो यहां आराम करने के लिए थे। बिहार से अलग होने के पहले तक यह खादी के प्रचार-प्रसार का बड़ा केंद्र था। । लेकिन, झारखंड बनने के बाद सरकारी उपेक्षा के कारण हालत धीरे-धीरे खस्ता होती गई।

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