बच्चों के बर्ताव पर भास्कर सर्वे:कोरोना में 555 दिन लंबे गैप के बाद छठी से 8वीं क्लास के बच्चों के लिए हाल ही में स्कूल खुले हैं

रांची3 महीने पहले
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  • 56% बच्चे ही स्कूल आ रहे, इसमें 72% पढ़ाई में पहले से कमजोर हुए
  • 44% बच्चों में एकाग्रता कम हुई है, 13% का बर्ताव हुआ एग्रेसिव

झारखंड में कोरोनाकाल में 555 दिनों तक छठी से आठवीं की पढ़ाई बंद रहने से विद्यार्थियों के व्यवहार में काफी बदलाव आया है। दैनिक भास्कर के सर्वे में शामिल राज्य के 24 जिलों के 2400 शिक्षकों और 1200 अभिभावकों ने यह खुलासा किया है। 56% बच्चे स्कूल आ रहे हैं, पर इनमें से 44% का व्यवहार बदला हुआ है। स्कूल आने वाले बच्चों में 72% यानी 40 बच्चे पढ़ाई में पहले से कमजोर हो गए हैं। 44% बच्चे जो स्कूल नहीं आ रहे हैं, उनमें 82% यानी 36 बच्चों के न आने का कारण कोरोना का डर है।

वहीं, शिक्षकों ने बताया कि 50% पैरेंट्स स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजेशन को लेकर फिक्रमंद हैं। 32% पैरेंट्स पढ़ाई-लिखाई और 18% पैरेंट्स बच्चों के व्यवहार को लेकर चिंतित हैं। भास्कर ने राज्य के 240 स्कूलों के 10-10 टीचरों से बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर प्रश्न पूछा। फिर अभिभावकों से बच्चों के बर्ताव में अंतर जाना।सर्वे में राज्य के 240 स्कूल, इनमें रांची के ये 10 प्रमुख स्कूल: सर्वे में कुल 240 स्कूल शामिल थे, इनमें रांची के 10 प्रमुख स्कूल हैं-डीपीएस, जेवीएम श्यामली, सेंट जेवियर्स, ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, डीएवी हेहल, डीएवी कपिलदेव, मनन विद्या, ब्रिजफोर्ड, कैम्ब्रियन, शारदा ग्लोबल।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ : बच्चोें की सेल्फ इमेज का ध्यान रखें
सर्वे के परिणाम पर हमने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्री (सीआईपी), रांची के डॉ निशांत गोयल से बात की। निशांत सीआईपी में चाइल्ड एंड एडोलेसेंट साइकेट्री डिपार्टमेंट के इंचार्ज हैं। उन्होंने कोरोना के बाद बच्चों के प्रति कैसा व्यवहार किया जाए, उसके बारे में बताया...

शिक्षक-अभिभावकों का व्यवहार कैसा हो

  • सेल्फ इमेज: बच्चे अपने में आए बदलाव को सेल्फ इमेज से जोड़ते हैं। मोटापा या अन्य बदलाव पर शिक्षकों को देखना चाहिए कि दोस्त व सीनियर विद्यार्थी उन्हें इसके लिए तंग न करें।
  • मेंटल-फिजिकल-ग्रुप एक्टिविटी: कोराना की घटनाएं बच्चे भूल नहीं पाए हैं। इसलिए उन्हें मेंटल, फिजिकल, ग्रुप एक्टिविटी में इंगेज करें।
  • डायलॉग-मोटिवेशन: बच्चों से लगातार बातचीत करनी चाहिए। उनको लगातार मोटिवेट करते रहना होगा। सुरक्षा के लिए प्रेरित करना होगा।
  • फीडबैक मैकेनिज्म: स्कूलों को सुविधा के अनुसार एक महीने की जगह अब 15 दिनों में पीटीएम करनी चाहिए। इससे शिक्षक-अभिभावक दोनों बच्चों को अच्छे से समझेंगे और उन्हें संभालेंगे।
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