कोविड से मौत पर मुआवजा:सचिव ने 5 जून काे 7 दिनाें में डीसी से मांगी थी कोरोना से माैत की अाॅडिट रिपाेर्ट, 117 दिनों बाद भी नहीं मिली

रांची2 महीने पहले
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कोरोना की दूसरी लहर में जान गंवाने वालों के परिजनों को मुआवजा व सरकारी योजना का लाभ देने की बात कही जा रही है। लेकिन, पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के लिए अब तक सरकार के पास पुख्ता आंकड़े नहीं पहुंचे हैं कि दूसरी लहर में सही मायने में कितनी मौतें हुईं हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों में बीते एक अप्रैल से 21 मई तक 1253 मौतें बताई गईं। मौत का सही आंकड़ा पता लगाने के लिए डेथ ऑडिट होनी थी, जिससे आंकड़े बढ़ने की संभावना थी। क्योंकि, श्मशान अाैर कब्रिस्तानों में उस दौरान लाशों के कतार लगे थे। विभाग ने 5 जून को आदेश जारी कर 7 दिनों के अंदर डेथ रिपोर्ट सौंपने का निर्देश सभी जिलाें के डीसी को दिया। जबकि, 117 दिन बाद भी रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी। डेथ रिपोर्ट तैयार कराने का जिम्मा कमेटी बनाकर डीआरसीएचओ डॉ. शशिभूषण खलको को दिया गया था। वे सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त हैं। फिर भी सदर अस्पताल की भी रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी। डॉ. शशिभूषण खलखो ने कहा कि उन्हें डेथ ऑडिट के अलावा वैक्सिनेशन का प्रभारी भी बनाया गया है। इस वजह से उन्हें समय नहीं मिल सका।

प्राइवेट अस्पतालों से नहीं मिली रिपोर्ट

डीआरसीएचओ ने कहा कि कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने रिपोर्ट सीधा विभाग को भेजा है, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं है। आईडीएसपी के अनुसार, प्राइवेट अस्पतालों से विभाग को रिपोर्ट नहीं मिली है। वहीं, विधानसभा सत्र में स्वास्थ्य विभाग ने बताया गया था कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मौत की ऑडिट ही नहीं हुई तो कैसे पता चला कि मौत की वजह क्या थी।

सरकारी आंकड़ों में 1253 मौतें दर्ज

{कैसे मिलेगा लाभ : सरकारी आंकड़ाें में कोरोना से 1253 मौतें, पर 117 दिन बाद भी नहीं मिली ऑडिट रिपोर्ट, संभावना है कि इससे ज्यादा मौतें हुईं हैं, जिसकी ऑडिट होनी है, जो अब तक नहीं हुई।

{विडंबना : भास्कर के सवाल अब मुआवजा के लिए कैसे आवेदन करेंगे, इस पर पीड़ित परिवारों ने कहा- कोरोना काल में मौत हुई इसी आधार पर आवेदन करेंगे।

परिवार के समक्ष कोरोना से मौत के सबूत जुटाने का बड़ा संकट

जिन्होंने आरटीपीसीआर, रैपिड एंटीजन टेस्ट नहीं कराया और उनकी मौत हो गई, ऐसे लोगों के परिजन फंस गए हैं। क्योंकि, अब उनके सामने कोरोना से मौत का सबूत देना सबसे बड़ा संकट बन गया है।

कांटाटाेली निवासी नाजिया (बदला हुआ नाम) के पति की माैत 9 अप्रैल काे हाे गई थी। नाजिया ने बताया कि टेस्ट कराने नहीं गए, क्याेंकि हाॅस्पिटल में जगह नहीं थी। काेराेना काल में माैत को आधार बनाएंगे।

नामकुम निवासी रोहित सिंह (बदला हुआ नाम) की 48 वर्षीय पत्नी की माैत 21 मई काे हाे गई। रोहित ने बताया कि मेरे पास कोरोना के कोई सबूत नहीं है। इसलिए सरकार को विचार करना चाहिए।

रातू के रहने वाले विजय वर्मा की मौत 18 मई को घर में हुई। कोरोना के सारे लक्षण थे। बेटी भाव्या ने बताया कि ऑक्सीजन नहीं मिलने से पिता नहीं बचे। टेस्ट नहीं कराए थे, इसलिए कंफर्म रिपोर्ट नहीं है।

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