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तीसरी लहर खतरनाक:कोरोना की तीसरी लहर में 18 साल तक के सात लाख बच्चे हाे सकते हैं संक्रमित

रांची3 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • तीसरी लहर में बच्चों को होने वाले नुकसान के आंकलन के लिए गठित टीम ने सरकार काे साैंपी रिपाेर्ट
  • करीब 8 हजार बच्चाें काे आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत हाे सकती है

झारखंड में काेराेना की तीसरी लहर 0 से 18 साल तक के बच्चाें काे सबसे ज्यादा प्रभावित करेगी। राज्य में इस आयु वर्ग की आबादी करीब 1.43 लाख है। इनमें से करीब 5% यानी 7.17 लाख बच्चे इसकी चपेट में आ सकते हैं। यह दावा सरकार की कमेटी ने किया है। काेराेना की तीसरी लहर के आकलन के लिए इसका सर्वे चल रहा था। सर्वे पूरा हाेने के बाद कमेटी ने अपनी रिपाेर्ट सरकार काे साैंप दी है।

इसमें कहा गया है कि कुल संक्रमित बच्चाें में से करीब 28,700 बच्चे सिम्पटाेमैटिक हाेंगे। इनमें से 8610 बच्चाें की स्थिति गंभीर हाे सकती है। इन्हें आईसीयू में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। इन सुझावाें पर”मैन्युअल फॉर प्रिपरेशन प्रीवेंशन एंड प्लानिंग फॉर कोविड-19, थर्ड वेव इन झारखंड, द वे फॉरवर्ड”नामक पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक का मंगलवार काे मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने विमाेचन किया।

कमेटी ने ये सुझाव दिए

  • सभी जिला अस्पतालाें में पेडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) की स्थापना की जाए। इससे सहूलियत होगी।
  • जिला अस्पतालाें में रांची, पलामू, हजारीबाग, दुमका में 20 बेड का पीआईसीयू और बाकी जगहों पर 10 बेड का पीआईसीयू बनाया जाए।
  • इन जगहों पर वेंटिलेटर थेरेपी, एचएफएनसी (हाई फ्लो नेसल केनूला) थेरेपी की सुविधा भी दी जाए।
  • यहां सी-पैप (कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवेब प्रेसर) की भी सुविधा जरूर होनी चाहिए।
  • मेडिकल कॉलेज, और शहर के बड़े अस्पतालाें में अलग से पीआईसीयू की स्थापना की जाए।
  • सभी सीएचसी में हाई फ्लो के 4 और ऑक्सीजन के 10 बेड की स्थापना करें।
  • सभी कुपाेषण सेंटर में अलग से कोविड वार्ड बनाएं। कम से कम 50% बेड बच्चाें के लिए आरक्षित करें।
  • डाॅक्टराें काे प्रशिक्षित करें और नर्साें काे बच्चाें के इलाज के लिए तैयार करें। अन्य कमियाें काे भी दूर करें।
  • सिविल सर्जन और डीसी की भी जिम्मेदारी तय करें।
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