पटरी पर झारखंड की अर्थव्यवस्था:सुधार के संकेत, अप्रैल में राजस्व वसूली 3550 करोड़ थी, सितंबर में बढ़कर 5188 करोड़ हुई

रांची13 दिन पहलेलेखक: अमरेंद्र कुमार
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कोरोना की दूसरी लहर के बाद अब राज्य की अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगी है। बाजार की अर्थव्यवस्था में सुधार होने से सरकार का वाणिज्यकर और उससे जुड़े दूसरे विभागों का राजस्व संग्रहण बढ़ रहा है। पिछले साल अप्रैल से इस साल सितंबर तक बेरोजगारी दर 33.5% घटी है।

वर्ष 2020 की दो तिमाही पर नजर डालें, तो बेहतर आंकड़े सामने आए हैं। 30 सितंबर को खत्म हुई दूसरी तिमाही में राज्य सरकार की राजस्व वसूली में सुधार हुआ है। अप्रैल 2021 में जहां केंद्रीय करों से मिलने वाले राजस्व और राज्य का अपना राजस्व 3550 करोड़ था, वह सितंबर में बढ़कर 5188 करोड़ हो गया है।

इसी तरह वाणिज्यकर और परिवहन क्षेत्रों में भी राजस्व वसूली में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल तीसरी तिमाही में दिसंबर महीने में जो राजस्व की स्थिति थी, वह इस बार सितंबर में ही पहुंच गई है। पिछले साल दिसंबर में जहां 5224 करोड़ राजस्व आय थी, इस बार सितंबर में ही 5188 करोड़ रुपए दर्ज हुई है।

राज्य का राजस्व 2020 में (राशि करोड़ में) और राजस्व वसूली 2021 में (राशि करोड़ में)
राज्य का राजस्व 2020 में (राशि करोड़ में) और राजस्व वसूली 2021 में (राशि करोड़ में)

वाणिज्यकर, परिवहन, खान, निबंधन, उत्पाद विभागों का राजस्व हुआ दोगुना

इस बार कंप्लीट लॉकडाउन नहीं हुआ। राज्य के प्रमुख राजस्व उगाही करने वाले वाणिज्यकर, परिवहन, खान, निबंधन, उत्पाद, भू-राजस्व विभागों का राजस्व दो गुणा से अधिक है। वर्ष 2020 के अप्रैल में इन विभागों का राजस्व 1176 करोड़ रुपए था। इस बार यह वसूली 2427 करोड़ रुपए है। इस कारण इस बार किसी प्रकार के खर्च पर कोई रोक नहीं है।

बेरोजगारी भी पिछले साल 47% थी, इस साल 13.5% पर आ गई : अप्रैल-2020 में झारखंड की बेरोजगारी दर 47% थी। इस साल अप्रैल में यह घटकर 16.5% रह गई। सीएमआईई (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनाॅमी) के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी और मार्च में यह आंकड़ा 12 और 13% था। अप्रैल-2021 में बेरोजगारी दर झारखंड में कम होकर 16.5% हो गई। वहीं सितंबर-2021 में यह 13.5% पर पहुंच गई है।

एक्सपर्ट व्यू

- डाॅ. हरिश्वर दयाल, राजकोषीय अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रमुख

कंस्ट्रक्शन, ट्रांसपोर्टेशन चलता रहा, इसलिए सुधर रही अर्थव्यवस्था

पिछले साल कोरोना के कारण पहली दो तिमाही में अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब रही। आंकड़ों पर गौर करें तो स्पष्ट होगा कि अर्थव्यवस्था अब सुचारु हो रही है। इसके कारण भी हैं। इस बार कंस्ट्रक्शन का काम चलता रहा। ट्रांसपोर्टेशन भी बहुत हद तक चालू है। अन्य आर्थिक गतिविधियों के भी जल्द पटरी पर आने की संभावना है।

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