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  • Teachers Will Be Able To File A Case In The High Court Only After Crossing The Barrier Of Jharkhand Education Tribunal, Only After The Decision Of The Tribunal, The High Court Will Be Able To Go

एजुकेशन ट्रिब्यूनल की नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी:झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण का बैरियर पार कर ही हाईकोर्ट में मामला दर्ज करा पाएंगे शिक्षक, ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद ही जा सकेंगे हाईकोर्ट

रांची4 दिन पहलेलेखक: विनय चतुर्वेदी
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  • सरकारी शिक्षकों के शिकायतवाद पर पहले न्यायाधिकरण में होगी सुनवाई, कोर्ट में अभी करीब 3500 मुकदमे लंबित
  • सरकार चाहती है, शिक्षक न्यायधिकरण का सहारा लें, कोर्ट के चक्कर में ना पड़ें

राज्य के सरकारी शिक्षक अब सीधे हाईकोर्ट नहीं जा पाएंगे। हाईकोर्ट के रास्ते में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण का बैरियर खड़ा होगा। कोर्ट जाने के पहले इस बैरियर को पार करना होगा। उन्हें अपनी शिकायतवाद पहले यहां दायर करानी होगी। उस पर सुनवाई शुरू होगी। शिक्षकों के पक्ष में फैसला आया, तो विभाग उस पर अमल करेगा। अगर शिक्षक ट्रिब्यूनल के निर्णय से असंतुष्ट हुए, तो फिर वे हाईकोर्ट जा सकते हैं। एजुकेशन ट्रिब्यूनल में अब तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, पर शिक्षा विभाग यह प्रावधान जोड़ना चाहता है। लिहाजा, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग शिक्षा न्यायाधिकरण की नियमावली में परिवर्तन कर रहा है। विभाग इसे ट्रिब्यूनल को और सशक्त करने का नाम दे रहा है।

दरअसल निदेशालय हो या विभाग, अधिकतर कार्य दिवस में शिक्षा विभाग के अधिकारी मुकदमे और सुनवाई के दौरान दिए जानेवाले लिखित जवाब को तैयार करने में ही सदैव लगे रहते हैं। आये दिन अधिकारियों को हाईकोर्ट में सशरीर भी उपस्थित होना पड़ता है। एक जानकारी के मुताबिक अभी करीब साढ़े तीन हजार मुकदमे लंबित हैं। केस का बोझ कम हो, इसके लिए वैसे शिक्षक, जिन्होंने एलएलबी किया हुआ है, उनका सहयोग तो विभाग लेता ही है, अन्य कई अधिकारियों को भी सिर्फ इसी काम के लिए लगाया है।

अधिवक्ताओं की एक टोली भी इस काम में लगातार लगी रहती है। विभाग में एक तो अधिकारियों की वैसे ही कमी है। अब ज्यादातर को इधर लगा देने के बाद, विभाग के अन्य कार्यों पर प्रभाव पड़ता है।

अवमाननावाद के भी दर्जनों मुकदमे लंबित
शिक्षकों के विभिन्न मुकदमों के अलावा शिक्षा विभाग में अवमानना वाद के दर्जनों मुकदमे भी लंबित हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे विभागीय अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं, तो विभागीय अधिकारी हर छोटी बात पर शिक्षकों के कोर्ट चले जाने की बात कहते हैं। ऐसे में अब शिक्षा न्यायधिकरण की नियमावली में परिवर्तन किया जा रहा है, ताकि शिक्षक पहले न्यायधिकरण का सहारा लें, फिर वे अदालत की ओर रुख करें।

एजुकेशन ट्रिब्यूनल में अभी कोई अध्यक्ष नहीं
वर्तमान में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण में कोई भी अध्यक्ष नहीं है। निवर्तमान अध्यक्ष के. विद्यासागर के तीन वर्ष का कार्यकाल पिछले महीने समाप्त हो चुका है। अध्यक्ष के अलावा और भी कई कर्मचारियों के पद यहां खाली हैं।

शिक्षा सचिव ने कहा- शिक्षा न्यायाधिकरण को और सशक्त करने पर हो रहा काम

शिक्षा सचिव राजेश कुमार शर्मा ने कहा है कि विभाग शिक्षा न्यायाधिकरण को और सशक्त करने पर काम कर रहा है। शिक्षा न्यायधिकरण को यह शक्ति देना चाहते हैं कि कोई भी शिक्षक अगर विभाग के निर्णय से खुश नहीं है, तो वह अपनी बात सबसे पहले शिक्षा न्यायाधिकरण मंे रख, उसका फैसला वहां हो। अगर उस फैसले के बाद भी शिक्षक खुश नहीं होते हैं, तो वे आगे कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

शिक्षक संघों का विरोध, बोले, शिक्षकों के अधिकारों को दबाने का शासन का नया फंडा है

माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव रवींद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों को दबाने के लिए यह सब शासन का एक फंडा है। शिक्षकों के सारे काम ससमय होते रहें, तो वे कार्ट जाए ही क्यांें। अब देखें, नए राज्य में शिक्षकों का प्रमोशन हुआ ही नहीं। तीन जिलों में ही प्रवरण वेतनमान मिला। अब शिक्षक क्या करें, कहां जाएं? प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षकों को परेशान करने का विभाग एक और तरीका खोज रहा है।

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